केस डायरी में कंप्यूटर प्रिंटआउट चिपकाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका पर उठे सवाल

भिवंडी

भिवंडी | संवाददाता

भिवंडी शहर पुलिस की केस डायरी के रखरखाव को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने केस डायरी का निरीक्षण करते हुए पाया कि जांच अधिकारी ने कंप्यूटर पर तैयार किए गए विवरण का प्रिंटआउट पहले से क्रमांकित और बंधी हुई केस डायरी के पन्नों पर चिपकाया था। अदालत ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह रिकॉर्ड तैयार करने से जांच में हुई कमियों, निष्क्रियता या गलतियों को छिपाने तथा बाद में रिकॉर्ड में बदलाव की गुंजाइश पैदा हो सकती है।

यह मामला रिट पिटीशन नंबर 4073/2026, अफाक अहमद मोहम्मद जाहिद शेख बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य से संबंधित है। बॉम्बे हाईकोर्ट की क्रिमिनल अपीलेट जुरिस्डिक्शन की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता शामिल हैं, ने 19 अगस्त 2026 को इस मामले में आदेश पारित किया।

केस डायरी में प्रिंटआउट चिपकाने पर सवाल

अदालत के निरीक्षण में सामने आया कि भिवंडी शहर पुलिस थाने के जांच अधिकारी और पुलिस निरीक्षक विशाल पवार ने केस डायरी का विवरण कंप्यूटर पर तैयार किया था। इसके बाद उसका प्रिंटआउट पहले से क्रमांकित और बंधी हुई केस डायरी के पन्नों पर चिपकाया गया।

अदालत के अनुसार संबंधित केस डायरी भिवंडी शहर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की ओर से जारी की गई थी और उसमें पृष्ठ संख्या 1 से 52 तक थी। 11 जुलाई 2026 की केस डायरी नंबर 1ए का प्रिंटआउट बंधी हुई केस डायरी के पेज नंबर 4 और 5 पर चिपका हुआ मिला।

कोर्ट ने विशेष रूप से नोट किया कि प्रिंटआउट इस तरह चिपकाने के संबंध में रिकॉर्ड पर कोई स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों की काउंटरसिग्नेचर भी नहीं

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि केस डायरी के किसी भी पन्ने पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, सहायक पुलिस आयुक्त या संबंधित जोन के पुलिस उपायुक्त की काउंटरसिग्नेचर अथवा मंजूरी मौजूद नहीं थी।

अदालत ने आशंका जताई कि केस डायरी को इस तरह तैयार करने से जांच अधिकारी को अपनी जांच में हुई कमियों, निष्क्रियता या गलतियों को छिपाने अथवा बाद में गलत रिकॉर्ड तैयार करने का अवसर मिल सकता है। कोर्ट ने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

अदालत ने केस डायरी की फोटोकॉपी को रिकॉर्ड पर लिया और मूल केस डायरी जांच अधिकारी को वापस कर दी।

11 और 12 जुलाई की प्रविष्टियों पर भी सवाल

अदालत के आदेश में केस डायरी की 11 और 12 जुलाई 2026 की प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि इन प्रविष्टियों में याचिकाकर्ता के घर पुलिस कर्मचारियों के जाने या कथित फरार व्यक्ति की तलाश में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का कोई उल्लेख नहीं है।

इससे केस डायरी में दर्ज घटनाक्रम और पुलिस की ओर से बताई गई कथित कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

     BNSS की धारा 192(3) का हवाला

हाईकोर्ट ने केस डायरी के रखरखाव को लेकर BNSS की धारा 192(3) का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केस डायरी को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बनाए रखना आवश्यक है। मौजूदा मामले में पुलिस थाने द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया प्रथम दृष्टया इस प्रावधान की अनिवार्य प्रकृति के अनुरूप नहीं दिखाई देती।

पुलिस आयुक्त को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अफाक अहमद मोहम्मद जाहिद शेख ने 27 अगस्त 2026 को ठाणे शहर पुलिस आयुक्त को पत्र सौंपा है। पत्र में हाईकोर्ट के 19 अगस्त के आदेश का हवाला देते हुए मूल केस डायरी, संबंधित पुलिस रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

पत्र में आशंका जताई गई है कि आगे की न्यायिक कार्यवाही के दौरान रिकॉर्ड में किसी प्रकार का बदलाव, पन्नों की अदला-बदली या छेड़छाड़ न हो। साथ ही पुलिस प्रशासन से पत्र प्राप्त होने की पुष्टि करने का अनुरोध भी किया गया है।

        28 अगस्त को अगली सुनवाई

राज्य की ओर से पेश एपीपी के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। अब अगली सुनवाई में केस डायरी के रखरखाव, उसमें दर्ज प्रविष्टियों और पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर अदालत की आगे की दिशा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर: उपरोक्त समाचार में अदालत के आदेश में दर्ज प्रथम दृष्टया टिप्पणियों और याचिकाकर्ता की ओर से उठाई गई आशंकाओं को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

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