मनपा की जमीन पर मेला, परमिशन का खेल या अफसरों की अनदेखी?

भिवंडी

प्रभाग समिति-4 के सामने हफ्तों से तैयारियां; सहायक आयुक्त को आयोजक और अनुमति की जानकारी नहीं, फिर पुलिस ने किस आधार पर दी परमिशन?

अब्दुल गनी खान
भिवंडी के धोबी तालाब स्थित शाह मोहम्मद खुदा बख्श हॉल के सामने मनपा की जमीन पर कथित तौर पर लगाए जा रहे मेले को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मेले की तैयारियां पिछले कई दिनों से जारी हैं और बड़े झूले समेत मनोरंजन के अन्य साधन लगाए जा रहे हैं। हैरानी यह है कि यह जगह प्रभाग समिति-4 कार्यालय से कुछ ही दूरी पर है, लेकिन संबंधित अधिकारियों को आयोजन की पूरी जानकारी नहीं है।

सहायक आयुक्त को आयोजक तक की जानकारी नहीं

प्रभाग समिति-4 के सहायक आयुक्त अरविंद गुगरे से मेले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि मेला कौन लगवा रहा है, अनुमति किसने दी और यह कितने दिनों तक चलेगा। हालांकि, उनका कहना था कि आयोजक के पास अनुमति जरूर होगी।

यहीं से मामले का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—अगर मनपा की जमीन पर मेला लगाने की अनुमति है, तो संबंधित प्रभाग समिति के पास उसका रिकॉर्ड क्यों नहीं है?

मनपा की अनुमति के बिना पुलिस की परमिशन कैसे?

मेले को लेकर दूसरा अहम सवाल पुलिस की अनुमति पर है। यदि पुलिस ने आयोजन की अनुमति दी है, तो क्या उससे पहले मनपा प्रभाग समिति-4 से अनुमति या एनओसी ली गई थी? यदि नहीं, तो पुलिस ने किस आधार पर परमिशन दी? और यदि एनओसी ली गई है, तो उसकी जानकारी संबंधित सहायक आयुक्त को क्यों नहीं है?

17 हजार से ज्यादा शुल्क वाली जमीन पर मेले का हिसाब?

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि मनपा परिसर में शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए एक दिन का शुल्क 17 हजार रुपये से अधिक बताया जाता है। ऐसे में कई दिनों से चल रही मेले की तैयारियों के लिए जमीन का किराया और अन्य शुल्क किस आधार पर तय हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। मनपा के रिकॉर्ड में इसकी एंट्री और भुगतान का विवरण भी जांच का विषय है।

    झूलों की सुरक्षा भी जांच के घेरे में

मेले में आसमानी झूले समेत बड़े झूले लगाए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी फिटनेस, तकनीकी जांच और आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र की जांच जरूरी है। संबंधित विभागों की मंजूरी के बिना झूले शुरू किए गए तो किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी अहम सवाल है।

           जांच से साफ होगी तस्वीर

अब मनपा और पुलिस प्रशासन से अनुमति पत्र, एनओसी, जमीन उपयोग की शर्तें, शुल्क, आयोजक तथा झूलों की सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग उठ रही है। दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मनपा की जमीन पर यह मेला किसकी अनुमति से और किन शर्तों पर लगाया जा रहा है।

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