‘13 साल में बिल्डिंग जर्जर हुई तो हमारा क्या कसूर?’ रहवासियों की मांग—पहले पुनर्वास और पंचनामा, फिर हो तोड़फोड़
अब्दुल गनी खान
भिवंडी के नारपोली स्थित गंगारामवाड़ी इलाके में गुरुवार रात को कोहिनूर बिल्डिंग का एक हिस्सा ढहने से 10 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद रविवार को मनपा प्रशासन शेष खतरनाक हिस्से को गिराने के लिए पहुंचा। हालांकि, कार्रवाई शुरू होने से पहले ही बिल्डिंग के रहवासी सड़क पर उतर आए और तोड़फोड़ की कार्रवाई का जोरदार विरोध किया। रहवासियों ने मांग की कि पहले उनका पुनर्वास किया जाए, संपत्ति का पंचनामा तैयार हो और नुकसान का पूरा आकलन किया जाए। इसके बाद ही बिल्डिंग गिराने की कार्रवाई की जाए।
रहवासियों का सवाल था कि यदि वर्ष 2013 में बनी बिल्डिंग महज 13 वर्षों में जर्जर हो गई तो इसमें रहने वाले फ्लैट धारकों का क्या कसूर है? लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें अचानक घर खाली करने के लिए कहा जा रहा है। बारिश के मौसम में परिवार और सामान लेकर वे आखिर कहां जाएं?
भिवंडी मनपा प्रभाग समिति क्रमांक-4 के अंतर्गत भंडारी कंपाउंड के गंगारामवाड़ी इलाके में सर्वे नंबर 1557/0 पर चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 2013 में हुआ था। रहवासियों के अनुसार, कोहिनूर अपार्टमेंट की B-विंग में 48 फ्लैट, जबकि A-विंग में 64 फ्लैट थे।

गुरुवार रात करीब 11.20 बजे B-विंग का एक हिस्सा अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद रविवार सुबह मनपा की टीम ठेकेदार और पोकलेन मशीन के साथ बिल्डिंग के बचे हुए हिस्से को गिराने पहुंची।
जैसे ही मनपा टीम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू की, फ्लैट धारक सड़क पर उतर आए। रहवासियों ने कार्रवाई रोकते हुए कहा कि उनके घरों में अभी भी कीमती सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं। पहले उन्हें अपना सामान सुरक्षित बाहर निकालने का मौका दिया जाए, इसके बाद ही इमारत पर कार्रवाई की जाए।

रहवासियों ने मांग की कि मनपा प्रशासन पहले उनकी संपत्ति का पंचनामा करे और नुकसान का पूरा आकलन किया जाए। साथ ही बिल्डर की ओर से नई इमारत बनाकर देने का ठोस आश्वासन भी दिया जाए। रहवासियों का कहना है कि जब तक उनके भविष्य और पुनर्वास को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती, तब तक तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
रहवासियों का आरोप है कि मनपा की ओर से उन्हें पहले कभी इमारत को जर्जर या खतरनाक घोषित किए जाने की कोई स्पष्ट पूर्व सूचना नहीं दी गई। हादसे के बाद अचानक इमारत खाली करने का आदेश मिलने से कई परिवारों के सामने रहने का संकट पैदा हो गया है।
इस बीच प्रशासन ने हादसे वाली B-विंग से सटी A-विंग को भी असुरक्षित मानते हुए वहां रहने वाले लोगों को तत्काल इमारत खाली करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने और आवश्यक मरम्मत करने की बात कही गई है।
इसके बाद कई परिवारों ने अपना सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया है। हालांकि, A-विंग के रहवासियों ने भी कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि जब तक पूरी संपत्ति का पंचनामा, नुकसान का रिकॉर्ड, घर में मौजूद सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था तथा वैकल्पिक आवास का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक बिल्डिंग को गिराया नहीं जाना चाहिए।
रहवासियों के विरोध को देखते हुए प्रभाग समिति क्रमांक-4 के सहायक आयुक्त अरविंद घुंघरे ने फिलहाल तोड़फोड़ की कार्रवाई स्थगित कर दी। मनपा टीम मौके से लौट गई। सहायक आयुक्त ने बताया कि सोमवार को नागरिकों के साथ चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
मनपा की कार्रवाई के बाद कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। कुछ लोगों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया है और उन्हें गलियों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। रहवासियों का कहना है कि उनके पास न तो वैकल्पिक आवास की व्यवस्था है और न ही सामान सुरक्षित रखने की जगह।
सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि इमारत को पहले से खतरनाक माना जा रहा था, तो समय रहते उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
रहवासियों का आरोप है कि मनपा प्रशासन ने A-विंग को ध्वस्त करने की तैयारी के साथ ही इसके लिए ठेका भी दे दिया है। लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पहले प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि इमारत खाली कराने का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार, B-विंग हादसे के बाद A-विंग की स्थिति को देखते हुए किसी भी संभावित जनहानि को रोकना जरूरी है।
स्थानीय नगरसेवक यशवंत टावरे ने कहा कि मनपा प्रशासन को कार्रवाई से पहले हादसाग्रस्त इमारत और आसपास की इमारतों के सभी प्रभावित परिवारों से संवाद कर उन्हें विश्वास में लेना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि दुर्घटनाग्रस्त इमारत बेहद कमजोर थी और उसके निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि A-विंग की छत पर मोबाइल टावर लगाया गया था, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।
यशवंत टावरे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल वैकल्पिक आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी मनपा की जिम्मेदारी है।
कोहिनूर हादसे में 10 लोगों की मौत के बाद अब इमारत के बाकी हिस्से को गिराने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर मनपा प्रशासन संभावित जनहानि रोकने के लिए कार्रवाई को जरूरी बता रहा है, तो दूसरी ओर रहवासी पहले पुनर्वास, पंचनामा और अपने सामान की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। अब सोमवार को प्रशासन और रहवासियों के बीच होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं।

