अब्दुल गनी खान
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका की नई प्रशासनिक इमारत से उर्दू भाषा का नामफलक हटाए जाने के आरोप को लेकर शहर में नया विवाद खड़ा हो गया है। महानगरपालिका के पूर्व विपक्ष नेता एवं पूर्व नगरसेवक खालिद मुख्तार शेख ‘गुड्डू’ ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर 72 घंटे के भीतर उर्दू नामफलक को पुनः स्थापित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में मांग पूरी नहीं हुई तो शांतिपूर्ण जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन में खालिद शेख ने दावा किया है कि नई प्रशासनिक इमारत के उद्घाटन के समय उनके प्रयासों के बाद मराठी भाषा के साथ उर्दू में भी महानगरपालिका का नाम प्रदर्शित करने वाला नामफलक लगाया गया था, जो कई वर्षों तक यथावत रहा। उनका आरोप है कि हाल ही में बिना किसी सार्वजनिक सूचना, आदेश या कारण बताए उर्दू का नामफलक हटा दिया गया और वर्तमान में केवल मराठी एवं अंग्रेजी भाषा के फलक ही दिखाई दे रहे हैं।

पूर्व विपक्ष नेता ने अपने ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345, आठवीं अनुसूची, महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण (राजभाषा) अधिनियम, 2022 तथा सर्वोच्च न्यायालय के वर्षा बागड़े बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025) मामले के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा है कि कानून मराठी के साथ अन्य भाषाओं के उपयोग पर रोक नहीं लगाता। उनका कहना है कि भिवंडी में बड़ी संख्या में उर्दू भाषी नागरिक रहते हैं, इसलिए उर्दू नामफलक हटाना भाषाई अल्पसंख्यकों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।
ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, नई प्रशासनिक इमारत पर 72 घंटे के भीतर मराठी के साथ उर्दू भाषा का नामफलक पुनः लगाया जाए। दूसरी, नामफलक किस आदेश और किस कारण से हटाया गया, इसका लिखित स्पष्टीकरण दिया जाए। तीसरी, भविष्य में बिना सक्षम कानूनी आदेश के इस प्रकार की कार्रवाई न किए जाने का लिखित आश्वासन दिया जाए।
खालिद शेख ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं तो उर्दू भाषी समाज एवं नागरिकों के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर मामले को महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग, महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग तथा मुंबई उच्च न्यायालय के समक्ष भी उठाया जाएगा।
फिलहाल इस मामले में भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

