37 आवेदन की चर्चा, लेकिन मनपा ने अब तक सार्वजनिक नहीं की आवेदकों की आधिकारिक सूची; सपा विधायक रईस शेख के कथित प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस
अब्दुल गनी खान
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के 9 मनोनीत यानी स्वीकृत नगरसेवक पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 16 से 28 सितंबर तक चली आवेदन प्रक्रिया में करीब 37 लोगों द्वारा आवेदन किए जाने की चर्चा है। हालांकि, मनपा प्रशासन की ओर से अब तक आवेदकों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में संभावित नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के संभावित नामों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि विधायक रईस शेख कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के संभावित नामों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और उनके करीबी माने जाने वाले लोगों को आगे बढ़ाने की चर्चा है।
हालांकि, ये फिलहाल राजनीतिक आरोप और चर्चाएं हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विधायक रईस शेख अथवा संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चुनावी समीकरणों के बाद अब मनोनीत पदों पर भी नजर
राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) से जुड़े कुछ नगरसेवकों को विधायक रईस शेख के करीब माना जाता था। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी दावा है कि चुनाव के दौरान टिकट को लेकर उनकी राजनीतिक भूमिका रही थी।
अब मनोनीत नगरसेवकों के 9 पदों को लेकर भी यही सवाल उठाया जा रहा है कि क्या कांग्रेस और एनसीपी के हिस्से में आने वाले पदों पर भी रईस शेख के करीबी माने जाने वाले चेहरों को जगह मिलेगी।
कांग्रेस में सलीम शेख और अरफात शेख के नाम की चर्चा
कांग्रेस के हिस्से में संभावित तीन नामों को लेकर स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा बताई जा रही है। इनमें सलीम शेख और अरफात शेख के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं के बीच इन नामों को लेकर नाराजगी की चर्चा है। उनका सवाल है कि यदि इन चेहरों को मनोनीत नगरसेवक के लिए मौका मिलता है तो लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले स्थानीय कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया।
अरफात शेख के नाम को लेकर विशेष चर्चा है। राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उन्होंने आवेदन की अंतिम तारीख पर अपना फॉर्म दाखिल किया। इसके बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुईं। कुछ लोग उन्हें विधायक रईस शेख के करीबी के तौर पर देखते हैं।
हालांकि, अरफात शेख का नाम अभी मनोनीत नगरसेवक के रूप में आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है। इसलिए उनके नाम को लेकर चल रही बातों को फिलहाल राजनीतिक चर्चा और दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।
कांग्रेस के संभावित तीन नामों में यदि सलीम शेख और अरफात शेख शामिल होते हैं तो तीसरे नाम को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। यह नाम पार्टी के किसी पुराने कार्यकर्ता का होगा या किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एनसीपी के संभावित नाम में गिरीश म्हात्रे की चर्चा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के हिस्से में आने वाले एक मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर गिरीश म्हात्रे का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में है। स्थानीय राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उनका नाम संभावित दावेदारों में माना जा रहा है।
गिरीश म्हात्रे को एक सांसद का भतीजा बताया जा रहा है। यदि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल होता है तो पार्टी के स्थानीय पुराने कार्यकर्ताओं के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने की संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
आवेदकों की सूची सार्वजनिक न होने से बढ़ी अटकलें
मनोनीत नगरसेवकों की पूरी प्रक्रिया को लेकर अब मनपा प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद करीब 37 आवेदकों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं किए जाने से संभावित नामों को लेकर चर्चाओं और दावों को बल मिल रहा है।
स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की जानकारी सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है और राजनीतिक अटकलों पर भी विराम लग सकता है।
अब अंतिम 9 नामों का इंतजार
भिवंडी मनपा के 9 मनोनीत नगरसेवक पदों को लेकर फिलहाल कई नाम राजनीतिक चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
अब देखना यह है कि कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) संगठन से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देती हैं या नए चेहरों को मौका मिलता है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि जिन नामों को लेकर फिलहाल राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, उनमें से कितने नाम वास्तव में अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं।
फिलहाल 9 पदों के लिए सामने आ रही चर्चाओं ने भिवंडी की स्थानीय राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

