रंग-बिरंगे फूलों से सजी बथुकम्मा बनीं आकर्षण का केंद्र, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने महिलाओं को दिए पुरस्कार; हजारों श्रद्धालुओं के लिए की गई सेवा
अब्दुल गनी खान
भिवंडी। पावरलूम नगरी भिवंडी में तेलंगाना की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बथुकम्मा उत्सव बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के तेलुगू बहुल इलाकों में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा पहनकर रंग-बिरंगे फूलों से सजी बथुकम्मा की पूजा की। इसके बाद पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने आकर्षक बथुकम्मा तैयार करने वाली महिलाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। वहीं, विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए नाश्ते, मिठाई, प्रसाद और पीने के पानी की व्यवस्था की गई।

भिवंडी के पद्मनगर, कामतघर, बालाजीनगर, नई बस्ती, पांजापूर, अंजूरफाटा और कशेली समेत तेलुगू आबादी वाले क्षेत्रों में उत्सव की तैयारियां पहले से शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने विभिन्न रंगों और किस्मों के फूलों से करीब दो फीट या उससे अधिक ऊंचाई की आकर्षक बथुकम्मा तैयार कीं। फूलों की कीमतें बढ़ने के बावजूद महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
अम्मोरू माता, दुर्गा माता, येल्लम्मा, सरस्वती, पार्वती, कलश, भगवान वेंकटेश्वर, शिवलिंग, नंदी और भारत माता की प्रतिकृतियों से सजी बथुकम्मा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। पारंपरिक तेलंगाना गीतों पर महिलाओं ने सामूहिक नृत्य किया। देर रात से लेकर तड़के तक विभिन्न विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
अखिल पद्मशाली समाज की ओर से वरालादेवी, कामतघर, पेनगांव, अंजूरफाटा, कोंबड़पाड़ा, सुभाषनगर और बाडवड़ के विसर्जन घाटों पर स्वागत मंच लगाए गए। यहां महिलाओं का स्वागत किया गया और आकर्षक बथुकम्मा तैयार करने वाली प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पेय पदार्थों की व्यवस्था भी की गई।
इस आयोजन में समाज के अध्यक्ष पोट्टबत्तिनी रामकृष्ण, कार्याध्यक्ष कोंका मल्लेशम, कोषाध्यक्ष अवधूत बलराम और महासचिव गाजेंगी राजू समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
श्री मार्कंडेय महामुनी वाचनालय समिति और स्वाभिमान सेवा संस्था की ओर से पिछले 25 वर्षों से वरालादेवी घाट पर स्वागत मंच लगाकर श्रद्धालुओं की सेवा की जा रही है। इस वर्ष भी संस्थापक संतोष शेट्टी के नेतृत्व में आकर्षक बथुकम्मा बनाने वाली महिलाओं को चांदी के उपहार, साड़ियां और अन्य पुरस्कार दिए गए। आयोजकों के अनुसार, करीब 25 हजार श्रद्धालुओं को नाश्ता वितरित किया गया।

वहीं, कपिल पाटील फाउंडेशन ने लगातार 11वें वर्ष आयोजन में हिस्सा लिया। फाउंडेशन के अध्यक्ष और नगरसेवक सुमित पाटील के हाथों आकर्षक बथुकम्मा तैयार करने वाली महिलाओं को पुरस्कार दिए गए। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, नाश्ते और पेयजल की व्यवस्था की गई। आयोजन स्थल पर एलईडी स्क्रीन और ड्रोन कैमरों के जरिए भी उत्सव का प्रसारण किया गया।
तेलुगू प्रजा सेवा संस्था के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने भी कामतघर, पेनगांव और वरालादेवी सहित विभिन्न विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की सहायता की। संस्था के इस सेवा कार्य में जय तडिगोप्पुला, भास्कर गोरिट्याला, मल्लेशम कोंडी और रामप्रसाद वेमुला सहित अनेक सदस्यों ने योगदान दिया।
एमजी आर्ट्स के बथुकम्मा लोकगीत में अभिनय करने वाली पद्मशाली समाज की बेटी बोईन अनूह्या ने पद्मनगर इलाके में आयोजित उत्सव में हिस्सा लिया। उन्होंने महिलाओं के साथ पारंपरिक बथुकम्मा खेलकर उत्सव की रौनक बढ़ाई। उनके अभिनय वाले गीत भी इलाके में सुनाई दिए, जिससे महिलाओं और बच्चियों में खासा उत्साह देखने को मिला।
बथुकम्मा उत्सव में विधायक महेश चौगुले, पूर्व विधायक रूपेश म्हात्रे, महापौर नारायण चौधरी, पूर्व नगरसेवक निलेश चौधरी, साईनाथ पवार, महेंद्र गायकवाड, वैभव भोईर, रजिता कोंडा, विठोबा नाईक, एडवोकेट हर्षल पाटील, कल्याडपु बालकिशन और मार्गम गोपी सहित कई राजनीतिक, सामाजिक और सामुदायिक हस्तियां मौजूद रहीं।
भिवंडी में बथुकम्मा उत्सव के जरिए तेलंगाना की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली। विभिन्न संस्थाओं के सेवा कार्यों ने उत्सव को और भी व्यापक स्वरूप दिया।

