भिवंडी पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ पुलिस नाइक समेत दो पर केस दर्ज

ठाणे

आरोपी को बचाने के लिए रिश्वत लेकर एक साल पुराना सीसीटीवी रिकॉर्ड डिलीट करने का आरोप;

विशेष संवाददाता भिवंडी

भिवंडी केी भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में लगे सरकारी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से छेड़छाड़ कर महत्वपूर्ण सबूत नष्ट करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस नाइक उमेश चंद्रभान नागरे और एक सीसीटीवी तकनीशियन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। आरोप है कि एक आरोपी को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन कर पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी गई थी।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पुलिस नाइक उमेश चंद्रभान नागरे की पहले भिवंडी के भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में नियुक्ति थी। वर्तमान में वह उल्हासनगर नियंत्रण कक्ष में तैनात है। शिकायत में बताया गया है कि भिवंडी निवासी फरिदाबानो अल्ताफ अहमद मोमिन नामक महिला ने इस्म उर्फ अख्तरअली अब्बासअली मोमिन के खिलाफ शिकायत दी थी। आरोप है कि संबंधित मामले में कार्रवाई करने के बजाय आरोपी को बचाने के लिए पुलिस नाइक नागरे ने कथित तौर पर उससे आर्थिक लेन-देन किया और उसे पुलिस स्टेशन से फरार होने में मदद की।मामले की जांच के दौरान भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के सरकारी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जानकारी सामने आई।जांच में पता चला कि 14 मार्च 2025 रात 11:08 बजे के बाद की फुटेज तो है, लेकिन उससे पहले की रिकॉर्डिंग NVR हार्ड डिस्क से गायब है। आरोप है कि नागरे ने टेक्नीशियन की मदद से वह फुटेज डिलीट करवाई।शिकायत में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी केस के आदेश के मुताबिक थानों में CCTV फुटेज 12 से 18 महीने तक रखना जरूरी है। फिर भी डिलीट करना कोर्ट की अवहेलना और सबूत मिटाना है।इस संबंध में भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक  विक्रम मोहिते की शिकायत के आधार पर 4 नवंबर 2026 को मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक दीपक शंकर जाधव को सौंपी गई है।इस घटना से पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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