मंदी, कच्चे माल की महंगाई और बढ़ती लागत से टूटा कारोबार, एक सप्ताह बाद होगी समीक्षा
विशेष संवाददाता | भिवंडी
कपड़ा उद्योग में छाई मंदी और कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा महंगाई का सीधा असर अब भिवंडी के साइजिंग उद्योग पर पड़ गया है। कुशल मजदूरों की कमी, पगार में भारी बढ़ोतरी और सरकारी विभागों के निर्देशों के पालन से उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि साइजिंग उद्योग के लिए काम करना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इसी को लेकर 6 नवंबर 2026को भिवंडी साइजिंग वेलफेयर एसोसिएशन की विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में साइजिंगो के सदस्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। साइजिंग उद्योग की वर्तमान परिस्थितियों पर गहन चर्चा के बाद स्थायी समाधान के लिए एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से अहम निर्णय लिए हैं।जिसके तहत भिवंडी का समस्त साइजिंग उद्योग दिनांक 08 नवंबर 2026, सुबह 7:00 बजे से अनिश्चितकाल काल के लिए पूर्णतः बंद रहेगा।बंदी के दौरान एक सप्ताह के बाद एसोसिएशन की पुनः बैठक बुलाकर परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी और साइजिंग के रेट में बढ़ोतरी तथा बंदी के विषय पर निर्णय लिया जाएगा। सकारात्मक समाधान के साथ साइजिंग उद्योग चालू होने पर विभिन्न सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अनुमान्य ईंधन (कोयला / बायोफ्यूल) के प्रयोग को सुनिश्चित किया जाएगा।उक्त जानकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष व बिंदु साइजिंग के मालिक अजय यादव ने दी है।
बता दे कि पावरलूम कारखाने में कपड़ा तैयार करने के लिए धागे को मजबूती प्रदान किया जाता है।जहां पर धागे पर एक विशेष प्रकार का घोल (स्टार्च या रसायन) चढ़ाया जाता है।इससे धागा मजबूत और चिकना बनता है।बुनाई के दौरान धागा बार-बार टूटता नहीं है और धागे में रगड़ सहने की क्षमता बढ़ती है।इसके बाद पावरलूम पर कपड़ा बुनने की प्रक्रिया आसान होती है। यानि साइजिंग का मुख्य काम धागे को बुनाई के लायक मजबूत बनाना है, ताकि पावरलूम पर कपड़ा बनाते समय धागा कम टूटे और उत्पादन अच्छा हो।साइजिंग में हड़ताल होने का सीधा असर पावर लूम पर पड़ेगा।

