अब्दुल गनी खान
भिवंडी: पुणे में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत के बाद पूरे महाराष्ट्र में अवैध शराब के कारोबार को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भिवंडी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से संचालित हो रहे अवैध देशी शराब के नेटवर्क पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शहर और तालुका के विभिन्न हिस्सों में 150 से अधिक अवैध शराब अड्डे सक्रिय हैं, जहां मजदूर वर्ग को निशाना बनाकर खुलेआम बिक्री की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक पद्मानगर, कामतघर, भंडारी कंपाउंड, खाड़ीपार, खोनी, नागांव और शेलार मीटपाड़ा समेत कई इलाकों में अवैध देशी शराब का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोग निवास करते हैं। आरोप है कि सस्ती शराब की मांग का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी संगठित नेटवर्क के जरिए इस धंधे को संचालित कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खाड़ियों के किनारे, सुनसान इलाकों और जंगलों में हाथ भट्ठी की शराब तैयार की जाती है, जिसे बाद में छोटे-छोटे अड्डों के माध्यम से बेचा जाता है। शाम होते ही कई मजदूर बस्तियों में इन अड्डों पर भीड़ लगना आम बात बन गई है।
पुणे कांड के बाद भिवंडी भी जांच के घेरे में
पुणे में जहरीली शराब कांड की जांच के दौरान भिवंडी का नाम भी सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भिवंडी तालुका के वल ग्रामपंचायत क्षेत्र स्थित एक गोदाम पर छापेमारी कर करीब 5,929 लीटर मिथेनॉल जब्त किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी मिथेनॉल का इस्तेमाल पुणे में जहरीली शराब बनाने में किए जाने की आशंका जताई गई है। इस कार्रवाई के बाद अवैध शराब कारोबार से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।
कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा धंधा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग और पुलिस समय-समय पर कार्रवाई तो करती है, लेकिन अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो पाता। कई मामलों में कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही नए ठिकानों से फिर बिक्री शुरू हो जाती है। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सामाजिक और स्वास्थ्य संकट की बढ़ती आशंका
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध शराब का दुष्प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसके कारण कई परिवार आर्थिक तंगी, घरेलू कलह और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। नशे की लत के चलते अपराध और हिंसा की घटनाओं में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
पुणे की घटना के बाद भिवंडी में भी जहरीली शराब को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अवैध शराब के अड्डों के खिलाफ लगातार अभियान चलाने, निर्माण स्थलों को नष्ट करने और इस कारोबार से जुड़े लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुणे कांड और भिवंडी से मिथेनॉल की बरामदगी के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस अवैध नेटवर्क को तोड़ने में कितनी सफलता हासिल करता है।

