दिल्ली होटल अग्निकांड: जान बचाने वाले युवकों को सम्मानित किया जाए, परवेज खान (पीके) की मांग

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अब्दुल गनी खान
भिवंडी/नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाने वाले स्थानीय युवकों और नागरिकों को सरकारी सम्मान दिए जाने की मांग उठी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी परवेज खान (पीके) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से इन बहादुर लोगों को सम्मानित करने की अपील की है।

गौरतलब है कि होटल में लगी भीषण आग में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसे के दौरान स्थानीय युवकों, दुकानदारों और आसपास के लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना राहत और बचाव कार्य में हिस्सा लिया तथा कई लोगों की जान बचाई।

परवेज खान (पीके) ने विशेष रूप से स्थानीय युवक वसीम रजा और उनके साथियों की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि वसीम रजा और उनकी टीम ने धुएं और आग की लपटों के बीच फंसे लोगों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं घायल होने के बावजूद वसीम राहत कार्य में जुटे रहे और कई लोगों की जान बचाने में सफल रहे।

उन्होंने उस गद्दा विक्रेता पिता-पुत्र की भी प्रशंसा की, जिन्होंने लगभग दो लाख रुपये मूल्य के नए गद्दे सड़क पर बिछा दिए ताकि होटल की ऊपरी मंजिलों से जान बचाने के लिए कूदने वाले लोग सुरक्षित नीचे उतर सकें। उनके इस मानवीय कदम की व्यापक सराहना हो रही है।

परवेज खान ने कहा कि ऐसे समय में जब समाज में धर्म, जाति और पहचान के आधार पर विभाजन की कोशिशें होती रहती हैं, इन युवकों ने मानवता और भाईचारे की मिसाल पेश की है। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंदों की सहायता कर यह संदेश दिया कि इंसान की जान सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इन युवकों और नागरिकों के साहस एवं सेवा भावना का उल्लेख करें, ताकि देशभर में मानवता और सामाजिक सद्भाव का संदेश मजबूत हो। साथ ही दिल्ली सरकार से भी इन बहादुर नागरिकों को विशेष पुरस्कार और सम्मान देने की मांग की।

परवेज खान (पीके) ने दिल्ली के सभी होटलों, रेस्तरां, अस्पतालों और सार्वजनिक भवनों में फायर सेफ्टी व्यवस्था की व्यापक जांच कराने की भी मांग की। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले लोग ही समाज और देश के वास्तविक नायक होते हैं। ऐसे लोगों का सम्मान करना केवल उनका अधिकार ही नहीं, बल्कि समाज में मानवता और सेवा की भावना को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक है।

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