अब्दुल गनी खान
भिवंडी : मानसून पूर्व नाला सफाई को लेकर भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस वर्ष नाला सफाई के लिए मनपा ने तीन ठेकेदारों को करीब 2.44 करोड़ रुपये का ठेका दिया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 लाख रुपये अधिक बताया जा रहा है। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सफाई कार्य में लापरवाही और खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए जांच की मांग तेज कर दी है।

मनपा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शहर के पांचों प्रभागों और मुख्य सड़कों के गटरों की सफाई के लिए अलग-अलग कंपनियों को ठेके दिए गए हैं। प्रभाग समिति क्रमांक-1 और 3 का ठेका सुजीत बालासाहब खरात को, प्रभाग समिति 2 और 5 का ठेका चंडिका कंस्ट्रक्शन को, जबकि प्रभाग समिति 4 का ठेका मेसर्स बुबेरे एंड एसोसिएट्स को दिया गया है। वहीं मुख्य सड़कों के गटर सफाई का कार्य उल्हासनगर की राहुल इंटरप्राइजेस को सौंपा गया है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 11 मई से सफाई कार्य शुरू हो चुका है और 45 दिनों में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि 15 दिन बीतने के बाद भी 30 फीसदी काम पूरा नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि सफाई कार्य के लिए करीब 14,798 मजदूरों को लगाया जाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों की भारी कमी दिखाई दे रही है।
शहरवासियों का आरोप है कि ठेकेदार सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं और बारिश शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि नालों का कचरा बारिश के पानी के साथ बह जाए। इसे लेकर पूर्व नगरसेवक अरुण राउत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की महिला शहर अध्यक्ष स्वाति कांबले ने मनपा प्रशासन पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि यह नाला सफाई का नहीं, बल्कि “मनपा की तिजोरी की सफाई” का ठेका बन गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता परशुराम पाल ने आरोप लगाया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी सफाई कार्य धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सहायक आयुक्त फैसल तातली और स्वास्थ्य अधिकारी जयवंत सोनावने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोनों अधिकारियों के तबादले की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से एक ही व्यवस्था के चलते हर मानसून में शहर जलभराव की समस्या झेलता रहा है।
हालांकि महापौर नारायण चौधरी ने दावा किया है कि वह खुद नाला सफाई कार्य की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ी तो वह खुद नालों में उतरकर सफाई कार्य की जांच करेंगे। महापौर ने भरोसा दिलाया कि इस वर्ष शहरवासियों को जलभराव की समस्या से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

