अब्दुल गनी खान
मुंबई: एनसीपी के दिवंगत नेता बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में उनकी पत्नी शहजीन सिद्दीकी ने मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विशेष अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और मामले के मुख्य आरोपी अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने में मुंबई पुलिस जानबूझकर देरी कर रही है। उनका दावा है कि यह सब “बाहरी दबाव” के कारण हो रहा है।

शहजीन सिद्दीकी ने अपने वकीलों प्रदीप घरात और त्रिवंकुमार कर्नानी के माध्यम से विशेष अदालत में आवेदन दाखिल किया। उन्होंने अदालत से मांग की कि मुंबई क्राइम ब्रांच से पूछा जाए कि आरोप तय होने की प्रक्रिया में अनमोल बिश्नोई की मौजूदगी जरूरी होने के बावजूद अब तक उसकी कस्टडी लेने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।
इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए विशेष अदालत ने विशेष लोक अभियोजक महेश मुले को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2024 की रात मुंबई के बांद्रा (पूर्व) स्थित बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर 66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी की तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मुंबई पुलिस अब तक 27 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। पुलिस के अनुसार, हत्या की साजिश अनमोल बिश्नोई ने रची थी, जो बिश्नोई गैंग का संचालन कर रहा था।
हालांकि, बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी का दावा है कि उनके पिता की हत्या भारत नगर पुनर्विकास परियोजना को लेकर हुई, क्योंकि वह वहां के झुग्गीवासियों का समर्थन कर रहे थे।
याचिका में कहा गया है कि जब जांच एजेंसी ने अनमोल बिश्नोई को हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया, तब परिवार ने उसकी गिरफ्तारी और कस्टडी के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी भी गोपनीयता का हवाला देकर देने से इनकार कर दिया गया।
याचिका के अनुसार, अमेरिका से 18 नवंबर 2025 को अनमोल बिश्नोई के भारत प्रत्यर्पण के बाद जांच अधिकारी को प्राथमिकता के आधार पर उसकी कस्टडी लेने की कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी का हवाला देकर मुंबई पुलिस ने कोई पहल नहीं की।
शहजीन सिद्दीकी ने अदालत में आरोप लगाया कि यदि अनमोल बिश्नोई से पूछताछ होती है तो हत्या के असली मकसद और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। उनका आरोप है कि इन्हीं तथ्यों के उजागर होने के डर और बाहरी दबाव के चलते अभियोजन एजेंसी जानबूझकर उसकी कस्टडी लेने से बच रही है।
फिलहाल अदालत ने मामले में अभियोजन पक्ष से जवाब तलब किया है। अब अगली सुनवाई में मुंबई पुलिस और अभियोजन पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद अदालत आगे का निर्णय लेगी।

