मनपा पर लापरवाही का आरोप, नागरिकों ने उठाए सवाल; प्रशासन बोला- जल्द होगी पूरी कार्रवाई
अब्दुल गनी खान
भिवंडी में अवैध और जर्जर इमारतों के खिलाफ शुरू की गई मनपा की तोड़क कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर निगम ने कई इमारतों पर केवल आंशिक तोड़क कार्रवाई कर अपने दायित्व की इतिश्री कर ली, जबकि शहर के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों अर्ध-ध्वस्त और अतिजर्जर इमारतें आज भी खड़ी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये इमारतें किसी भी समय भरभराकर गिर सकती हैं और बड़ा हादसा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, भिवंडी महानगरपालिका ने इस वर्ष मानसून से पहले शहर की 1,439 खतरनाक और जर्जर इमारतों की सूची जारी की थी। इनमें 289 इमारतों को अतिधोखादायक श्रेणी में रखा गया है। आरोप है कि कई इमारतों को केवल दिखावे के लिए खाली कराकर उनका कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया, लेकिन उसके बाद न तो शेष हिस्से को पूरी तरह ध्वस्त किया गया और न ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई।
शहर के माधवनगर, पद्मानगर, श्रीरंगनगर, भंडारी कंपाउंड सहित मनपा के पांचों प्रभागों में कई अर्ध-टूटी इमारतें आज भी खड़ी हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आधी तोड़ी गई इमारतें पहले से अधिक खतरनाक हो चुकी हैं और लगातार बारिश के बीच इनके गिरने की आशंका बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, मनपा द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कई अतिजर्जर इमारतें अब भी खाली नहीं कराई जा सकी हैं। इनमें दरगाह दिवानशाह स्थित घर क्रमांक-415, दरगाह रोड स्थित घर क्रमांक-316 (खालिद सरदार एवं हारून शेख से संबंधित भवन) तथा कारवली रोड पर बिस्मिल्लाह साइजिंग के सामने स्थित सलीम हाजी का भवन प्रमुख रूप से शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन भवनों को खाली कराने में राजनीतिक संरक्षण, भवन एवं जमीन मालिकों के बीच विवाद तथा मौके पर आवश्यक पंचनामा नहीं होने जैसी वजहें बाधा बन रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन इमारतों को खाली कराकर पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। नागरिकों ने मनपा से आधी-अधूरी कार्रवाई के बजाय प्रभावी कदम उठाने और जनहानि रोकने की मांग की है।
इस संबंध में मनपा के उपायुक्त विक्रम दराडे ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश के बाद पांचों प्रभागों के सहायक आयुक्तों को खतरनाक इमारतों का सर्वे कर उन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अतिजर्जर इमारतों के पानी और बिजली कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा जल्द ही भवनों को खाली कराकर उन्हें पूरी तरह तोड़ा जाएगा।
हालांकि, हर मानसून में भिवंडी में जर्जर इमारतों के ढहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब खतरे की पहचान पहले ही हो चुकी है तो पूर्ण कार्रवाई में आखिर देरी क्यों हो रही है।

