रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर करने वाले पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध; अस्पतालों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों के 100 मीटर के दायरे में भी आतिशबाजी की मनाही
आदिल नोमानी
मुंबई: त्योहारों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) ने राज्यभर के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की है। बॉम्बे हाई कोर्ट के 22 सितंबर 2026 और 15 अक्टूबर 2026 के आदेशों के अनुपालन में जारी इस सूचना में पटाखे फोड़ने, जुलूसों में तेज रोशनी का इस्तेमाल करने और ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर कई प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है।
सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने की मनाही
मंडल की सूचना के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसमें सड़कें, गलियां, रास्ते और फुटपाथ शामिल हैं। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अदालतों जैसे साइलेंस जोन के 100 मीटर के दायरे में भी पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
रात 10 से सुबह 6 बजे तक शोर वाले पटाखों पर प्रतिबंध
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 5-ए(2) का हवाला देते हुए सूचना में कहा गया है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक शोर पैदा करने वाले पटाखे फोड़ना प्रतिबंधित है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि निजी परिसरों में होने वाले आयोजनों के दौरान भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना जरूरी है।
जुलूसों में लेजर और तेज रोशनी पर रोक
त्योहारों और जुलूसों के दौरान लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी इलेक्ट्रिक लाइट और बीम लाइट के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। किसी भी कार्यक्रम या जुलूस के आयोजन के समय संबंधित स्थल पर अथवा जुलूस के साथ ध्वनि स्तर मापने वाले उपकरण रखना अनिवार्य बताया गया है।
ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अपील
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नागरिकों से कम धुआं और कम शोर पैदा करने वाले ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने तथा लागू नियमों के तहत निर्धारित समय में ही आतिशबाजी करने की अपील की है।
सूचना में बताया गया है कि पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण, सीसा, बेरियम, स्ट्रॉन्शियम, तांबे के यौगिक, कैडमियम और एंटीमनी जैसी हानिकारक धातुएं तथा जहरीली गैसें वायु प्रदूषण बढ़ाती हैं। पटाखों का तेज और अचानक होने वाला शोर भी लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, सांस और हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों, बीमार व्यक्तियों तथा विद्यार्थियों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है।
नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
मंडल ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण नियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, भारतीय न्याय संहिता 2023 और विस्फोटक अधिनियम 1884 के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए(जी) का उल्लेख करते हुए नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को अपना मौलिक कर्तव्य मानने और ध्वनि व धुएं से प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से बचने की अपील की गई है।
नागरिक नियमों के उल्लंघन की शिकायत महा पर्यावरण ऐप (Maha Paryavaran App) के माध्यम से कर सकते हैं। यह सार्वजनिक सूचना महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव की ओर से जारी की गई है।

