सड़क का हुआ कंक्रीटीकरण, लेकिन पुराने पुलों की सुरक्षा व्यवस्था बदहाल; भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही से हादसे का खतरा
अब्दुल गनी खान| भिवंडी
भिवंडी-पारोल राज्य मार्ग का कंक्रीटीकरण तो कर दिया गया है, लेकिन इस मार्ग पर बने कई पुराने पुलों की सुरक्षा व्यवस्था अब भी सवालों के घेरे में है। कई पुलों पर सुरक्षा दीवार और मजबूत कठड़े नहीं होने से वाहन चालकों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है। खासकर रात के समय इन पुलों से गुजरना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा साबित हो सकता है।
हाईवे जाम से बढ़ी भारी वाहनों की आवाजाही
मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम का असर आसपास के वैकल्पिक मार्गों पर भी पड़ रहा है। घोड़बंदर रोड और कामण-चिंचोटी-खारबाव मार्ग पर भी जाम की स्थिति बनने के कारण बड़ी संख्या में भारी वाहन चालक जाम से बचने के लिए भिवंडी-पारोल मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे इस राज्य मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही में काफी इजाफा हुआ है।
कंक्रीट सड़क बनी, लेकिन पुलों की सुरक्षा भूली
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क का कंक्रीटीकरण होने के बाद मार्ग की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पुराने पुलों की सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया गया। कई पुलों पर सुरक्षा दीवार या पर्याप्त कठड़े नहीं होने से रात में वाहन चालकों को पुल की सीमा का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही और तेज रफ्तार के बीच पुलों पर सुरक्षा व्यवस्था का अभाव हादसे का बड़ा कारण बन सकता है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने चाहिए।
PWD से तत्काल सुरक्षा इंतजाम की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) से भिवंडी-पारोल मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन पुलों पर सुरक्षा दीवार या मजबूत कठड़े नहीं हैं, वहां तत्काल सुरक्षा अवरोध लगाए जाएं। इसके साथ ही पुराने पुलों की संरचनात्मक और सुरक्षा स्थिति की भी जांच कराई जाए।

नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले संभावित खतरे को टाला जा सके।

