सेक्युलर फ्रंट के नेताओं ने पत्र देकर कहा- राजनीतिक संशय की स्थिति पर जल्द स्थिति स्पष्ट करें
भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका की राजनीति में एक बार फिर ‘सेक्युलर फ्रंट’ को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के गटनेता और उपमहापौर तारिक अब्दुल बारी मोमिन तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की गटनेता मुसर्रत अरशद अंसारी ने महापौर को पत्र देकर भाजपा के चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

23 सितंबर को दिए गए पत्र में दोनों नेताओं ने कहा है कि भिवंडी के विकास और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पार्षदों ने ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ के तहत महापौर के नेतृत्व को समर्थन दिया था। पत्र में दावा किया गया है कि महापौर ने ‘तिलक भवन’ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और राकांपा (शरद पवार) के सांसद सुरेश बाल्या मामा म्हात्रे की मौजूदगी में फ्रंट में शामिल होकर धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर काम करने का आश्वासन दिया था।
पत्र में कहा गया है कि हाल ही में सामने आए एक वीडियो में महापौर भाजपा के दलीय प्रतीक चिह्न के साथ दिखाई दे रहे हैं। दोनों नेताओं ने इसे लेकर राजनीतिक संशय की स्थिति पैदा होने की बात कही है और महापौर से भिवंडी की जनता तथा नगरसेवकों के समक्ष जल्द अपना पक्ष स्पष्ट करने का आग्रह किया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि उनके लिए धर्मनिरपेक्षता महत्वपूर्ण राजनीतिक मूल्य है और भिवंडी की गंगा-जमुनी तहजीब तथा सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना उनकी प्रतिबद्धता है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे अपनी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा और राजनीतिक चरित्र से समझौता नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और समाजवादी पार्टी ने भिवंडी सेक्युलर फ्रंट के गठन की घोषणा की थी। बाद में महापौर चुनाव के दौरान भाजपा के बागी नगरसेवक नारायण चौधरी को इस फ्रंट का समर्थन मिला और वे महापौर चुने गए थे।
अब भाजपा के चुनाव चिह्न से जुड़े वीडियो को लेकर दिए गए इस पत्र के बाद महापौर की ओर से क्या स्पष्टीकरण आता है, इस पर स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर है।

