बिजली और इंटरनेट के तारों का जानलेवा जाल, शिकायतों के बाद भी मनपा-विभाग मौन
विशेष संवाददाता| भिवंडी
भिवंडी शहर की पहचान अब गड्ढों और ट्रैफिक के साथ-साथ सड़कों पर लटके तारों के मकड़जाल से भी होने लगी है। शहर के प्रमुख बाजारों, चौक-चौराहों और सबसे ज्यादा स्वर्गीय राजीव गांधी उड़ान पुल (कल्याण नाका) पर बिजली, टीवी और इंटरनेट के अवैध केबलों का बेतरतीब जाल मौत को खुला न्योता दे रहा है।

कल्याण नाका आज इस अवैध नेटवर्क का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है। उड़ान पुल के दोनों तरफ लगे स्ट्रीट लाइट के पोलों पर सैकड़ों केबलें इस कदर उलझ रही हैं कि जैसे पूरा पुल किसी जाले में कैद नजर आता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इंटरनेट और केबल ऑपरेटर बिना किसी परमिशन और प्लानिंग के पुरानी केबलों के ऊपर नई केबल डालते जा रहे हैं। पुरानी, कटी-फटी और बेकार केबलों को हटाया ही नहीं जाता।
हर पल हादसे का डर
नागरिकों का कहना है कि कई बार ये तार टूटकर सड़क पर गिर चुके हैं। बरसात और तेज हवा में तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उड़ान पुल से रोज हजारों बाइक, ऑटो और भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में अगर किसी दिन शॉर्ट सर्किट से आग लगी या करंट दौड़ा तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। पहले भी तार गिरने और करंट फैलने की घटनाएं हो चुकी हैं।
शिकायतें कई, कार्रवाई शून्य
स्थानीय रहिवासियों ने बताया कि इसको लेकर भिवंडी-निजामपुर मनपा के विद्युत विभाग को कई बार लिखित-मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। मनपा, एमएसईबी और केबल कंपनियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेती हैं। नतीजा, केबलों का जाल रोज और घना होता जा रहा है।
शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे शहर और खासकर उड़ान पुल का तत्काल सर्वे किया जाए और अवैध और अनुपयोगी केबलों को तुरंत हटाया जाए।बिना परमिशन केबल डालने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना और FIR की कार्रवाई हो।भविष्य के लिए अंडरग्राउंड या व्यवस्थित केबल डक्ट की नीति बनाई जाए।समय रहते अगर मनपा ने इस पर सख्त कदम नहीं उठाया, तो यह मकड़जाल भिवंडी के लिए किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।इस संबंध में मनपा के विजली विभाग में संपर्क किया गया , लेकिन कोई सार्थक जवाब नहीं मिला।

