6 महीने में ठेका खत्म, मनपा ने संभाली बाजार टैक्स वसूली; प्राइवेट लोगों से वसूली के आरोप, विभाग ने किया इनकार
अब्दुल गनी खान। भिवंडी
भिवंडी मनपा में बाजार टैक्स वसूली की करोड़ों रुपये की व्यवस्था महज छह महीने में ही लड़खड़ा गई। मनपा ने बाजार टैक्स वसूली का ठेका करीब 2.92 करोड़ रुपये सालाना में ‘पेस्ट कंट्रोल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ को दिया था। हालांकि, ठेकेदार ने घाटे का हवाला देते हुए छह महीने के भीतर ही काम छोड़ दिया। इसके बाद मनपा ने ठेका रद्द कर बाजार वसूली की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है। अब इसी नई व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि मार्केट विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण बाजारों और फुटपाथों से रोजाना टैक्स वसूली में कथित तौर पर बाहरी लोगों की मदद ली जा रही है। सूत्रों के अनुसार, फुटपाथ विक्रेताओं से 15 रुपये, हाथगाड़ी वालों से 30 रुपये और बड़े स्टॉल वालों से 60 रुपये प्रतिदिन वसूले जा रहे हैं। हालांकि, मनपा के पास प्रतिदिन कितनी राशि वसूल हो रही है और उसमें से कितनी रकम मनपा के खाते में जमा की जा रही है, इसका आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि उनसे नियमित रूप से पावती के नाम पर रकम ली जा रही है, लेकिन पूरी वसूली और मनपा के खजाने में जमा होने वाली रकम के बीच पारदर्शी हिसाब उपलब्ध नहीं है। दुकानदारों का कहना है कि यदि मनपा सीधे वसूली कर रही है तो रोजाना की कुल वसूली, जमा राशि और बकाया रकम का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ठेका क्यों हुआ रद्द?
मनपा ने बाजार टैक्स वसूली का ठेका ‘पेस्ट कंट्रोल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ को सालाना 2.92 करोड़ रुपये में दिया था। ठेकेदार ने काम शुरू करने के करीब छह महीने बाद घाटे का हवाला देते हुए काम छोड़ दिया। इसके बाद मनपा ने ठेका रद्द कर दिया और वसूली की जिम्मेदारी अपने स्तर पर संभाल ली।
अधिकारी ने प्राइवेट वसूली से किया इनकार
मामले में मनपा के विभाग प्रमुख स्नेहल पुण्यार्थी से मोबाइल पर संपर्क किया गया। उन्होंने प्राइवेट लोगों को वसूली के लिए लगाए जाने से इनकार करते हुए कहा कि ‘प्राइवेट आदमी नहीं लगाया गया है।’ हालांकि, रोजाना बाजार टैक्स से कितनी रकम वसूल हो रही है और मनपा के खाते में कितनी राशि जमा हो रही है, इस सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
अब सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये का ठेका छह महीने में ही खत्म हो गया है और मनपा ने सीधे वसूली शुरू कर दी है, तो रोजाना होने वाली वसूली का पूरा हिसाब-किताब किस तरह दर्ज किया जा रहा है? नागरिकों की मांग है कि मनपा दैनिक वसूली, बैंक में जमा राशि और संबंधित बाजारवार आंकड़े सार्वजनिक करे, ताकि वसूली व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका को दूर किया जा सके।

