एक ही परिवार को चार प्रभागों का ठेका मिलने पर मनपा की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अब्दुल गनी खान
भिवंडी मनपा द्वारा मानसून पूर्व कराई जा रही नाला सफाई के दौरान एक सफाई मजदूर की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही और ठेका व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में पुलिस ने ठेकेदार और मनपा के संबंधित अधिकारी समेत दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं, पांच में से चार प्रभाग समितियों में नाला सफाई का ठेका एक ही परिवार को दिए जाने से मनपा की कार्यप्रणाली भी विवादों में आ गई है।

जानकारी के अनुसार, पिरानी पाडा स्थित सत्तार मेडिकल क्षेत्र में नाले की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से 45 वर्षीय सफाई कर्मी Subhash Navsha Dighe की मौत हो गई। घटना के बाद शहर में मनपा प्रशासन, ठेकेदार और सफाई व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश फैल गया।
मामले में शांतीनगर पुलिस ने Chandika Construction के संचालक Balasaheb Kharat और भिवंडी मनपा के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106(1), 3(5) समेत गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि मौके पर मजदूरों के लिए न तो गैस जांच कराई गई और न ही मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, हेलमेट या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। इसी लापरवाही के कारण मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आ गया।
मजदूर संगठनों का आरोप है कि नाला सफाई के दौरान लगातार सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी। शिकायतों के बावजूद सुरक्षा मानकों को लागू नहीं किया गया। सामाजिक संगठनों ने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की गिरफ्तारी की मांग की है।
इस घटना के बाद भिवंडी मनपा के आरोग्य एवं स्वच्छता विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के मुताबिक, मनपा की पांच प्रभाग समितियों में से चार प्रभागों का नाला सफाई ठेका एक ही परिवार के पिता-पुत्र को दिया गया था। प्रभाग समिति क्रमांक 1 और 3 का ठेका Sujit Balasaheb Kharat को क्रमशः 40.72 लाख और 40.71 लाख रुपये में दिया गया, जबकि प्रभाग समिति क्रमांक 2 और 5 का ठेका बालासाहेब खरात की कंपनी चंडिका कंस्ट्रक्शन को करीब 40-40 लाख रुपये में मिला।
सूत्रों के अनुसार, चंडिका कंस्ट्रक्शन मूल रूप से निर्माण कार्य करने वाली कंपनी है, लेकिन कथित मिलीभगत के चलते उसे नाला सफाई का ठेका भी दे दिया गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही परिवार को चार प्रभागों का ठेका कैसे आवंटित कर दिया गया।
समाजसेवक Parshuram Pal ने पूरे ठेका प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि मनपा अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर एक ही परिवार को कई प्रभागों का ठेका दिया, जो पूरे सिस्टम की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
इस घटना ने एक बार फिर देश में मैनुअल सीवर और नाला सफाई व्यवस्था की अमानवीय तस्वीर सामने ला दी है। सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा उपकरणों के बिना मजदूरों को सीवर या नालों में उतारने पर रोक लगाए जाने के बावजूद भिवंडी में नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।

