भिवंडी एसटी स्टैंड के पुनर्विकास को मिली मंजूरी, 14.18 करोड़ रुपये से बदलेगी तस्वीर; श्रेय लेने की राजनीति भी तेज

भिवंडी

अब्दुल गनी खान
भिवंडी: वर्षों से जर्जर हालत में खड़े भिवंडी एसटी बस स्टैंड के पुनर्विकास का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। महाराष्ट्र सरकार ने बस स्टैंड के पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण के लिए 14 करोड़ 18 लाख रुपये की निधि मंजूर कर दी है। हालांकि निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है, लेकिन निधि मंजूरी की घोषणा के साथ ही स्थानीय राजनीति में श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है।

भिवंडी एसटी डिपो का उद्घाटन 20 मार्च 1972 को हुआ था। 54 वर्ष पुरानी इस इमारत की हालत अब बेहद खस्ता हो चुकी है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में भवन के स्लैब गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई जगहों पर पिलरों में दरारें पड़ चुकी हैं और लोहे की सरिया तक बाहर दिखाई देने लगी है। बस स्टैंड परिसर में जगह-जगह गड्ढे हैं, जबकि भवन की फर्श भी जर्जर हो चुकी है।

यात्रियों, चालक-परिचालकों और कर्मचारियों को रोजाना असुरक्षा के माहौल में काम करना पड़ रहा था। कुछ वर्ष पहले भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका ने इस भवन को खतरनाक घोषित कर दिया था। इसके बाद से लगातार बस स्टैंड के पुनर्निर्माण की मांग उठ रही थी।

सरकार द्वारा मंजूर की गई निधि से बस डिपो भवन, प्लेटफॉर्म, ट्रैफिक कंट्रोल रूम, डिपो मास्टर कार्यालय, आरक्षण कक्ष, पार्सल कार्यालय, चालक-परिचालक विश्राम कक्ष, पुलिस कक्ष, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पानी आपूर्ति, सीवेज व्यवस्था, विद्युत प्रणाली, अग्निशमन व्यवस्था, वर्षा जल संचयन, मुख्य प्रवेश द्वार और परिसर के कंक्रीटीकरण जैसे कार्य भी प्रस्तावित हैं।

          रोजाना 250 बसें, 537 फेरे

भिवंडी में लोकल रेल सेवा नहीं होने के कारण एसटी बसें ही आम लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन हैं। यहां से मुंबई, नासिक, पुणे, धुले, मालेगांव, अहमदनगर, वाडा, जव्हार और मोखाड़ा समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए बस सेवाएं संचालित होती हैं।

भिवंडी एसटी स्टैंड से प्रतिदिन लगभग 250 बसें संचालित होती हैं, जो कुल 537 फेरे लगाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, सब्जी विक्रेताओं और दूध व्यवसायियों के लिए यह बस स्टैंड जीवनरेखा माना जाता है। रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही और बढ़ते दबाव के कारण भी डिपो की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

             कहां होगा कितना खर्च

बस डिपो भवन – 8.54 करोड़ रुपये

पानी आपूर्ति एवं सीवेज सिस्टम – 42.70 लाख रुपये

विद्युत व्यवस्था – 93.94 लाख रुपये

अग्निशमन प्रणाली – 12.20 लाख रुपये

वर्षा जल संचयन – 3 लाख रुपये

मुख्य प्रवेश द्वार – 8.80 लाख रुपये

डिपो परिसर कंक्रीटीकरण – 94.40 लाख रुपये


    निधि मंजूर होते ही शुरू हुई श्रेय की जंग

एसटी स्टैंड के पुनर्विकास के लिए निधि मंजूर होने के साथ ही राजनीतिक हलकों में इसका श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा भी शुरू हो गई है। अलग-अलग जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल इस मंजूरी को अपने प्रयासों का परिणाम बता रहे हैं।

एक ओर भिवंडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेश म्हात्रे इस निधि स्वीकृति को अपने लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विधायक रईस शेख के समर्थक सोशल मीडिया पर इसे उनकी पहल का परिणाम बताकर प्रचार कर रहे हैं। वहीं विधायक महेश चौघुले भी अपने विधानसभा क्षेत्र में स्थित इस बस स्टैंड के लिए किए गए प्रयासों का हवाला दे रहे हैं।

हालांकि यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा श्रेय नहीं, बल्कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू होकर आधुनिक और सुरक्षित बस स्टैंड का निर्माण होना है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंजूर निधि जमीन पर कब उतरती है और भिवंडी के लाखों यात्रियों को नई सुविधाएं कब मिलती हैं।

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