मनपा का दावा- 69 इमारतें हटाईं, लेकिन 289 अति खतरनाक भवनों में अब भी रह रहे हजारों परिवार
अब्दुल गनी खान
भिवंडी: मानसून की दस्तक से पहले भिवंडी शहर में जर्जर और खतरनाक इमारतों का संकट एक बार फिर गंभीर हो गया है। भिवंडी नगर निगम (मनपा) के ताजा सर्वे के अनुसार शहर में कुल 1439 इमारतें खतरनाक घोषित की गई हैं। इनमें 289 इमारतें अति खतरनाक (सी-1 श्रेणी) की हैं, जहां हजारों लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। अनुमान है कि इन भवनों में रहने वाले 6041 परिवारों के 30 हजार से अधिक लोगों पर हर समय हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

मनपा के शहर विकास अधिकारी समीर जवरे ने बताया कि खतरनाक इमारतों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें 737 इमारतें सी-2ए श्रेणी में हैं, जिन्हें खाली कराकर मरम्मत की जरूरत है। 369 इमारतें सी-2बी श्रेणी की हैं, जिनमें रहते हुए मरम्मत संभव है, जबकि 44 इमारतें सी-3 श्रेणी में हैं, जिन्हें मामूली मरम्मत की आवश्यकता है।
प्रभाग समिति-2 में सबसे ज्यादा खतरा
मनपा के आंकड़ों के अनुसार प्रभाग समिति-2 क्षेत्र में सबसे अधिक 382 खतरनाक इमारतें हैं। इसके अलावा प्रभाग समिति-4 में 362, प्रभाग समिति-5 में 340, प्रभाग समिति-3 में 217 और प्रभाग समिति-1 में 138 जर्जर इमारतें चिन्हित की गई हैं।
नोटिस जारी, कार्रवाई पर सवाल
मनपा प्रशासन का कहना है कि सभी खतरनाक और अति खतरनाक इमारतों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अत्यंत जर्जर इमारतों को गिराया जाएगा, जबकि मरम्मत योग्य भवनों के मालिकों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर साल बारिश से पहले कार्रवाई की घोषणा तो होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
पिछले साल 1444 इमारतें थीं खतरनाक
मनपा सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्ष शहर में 1444 खतरनाक इमारतें चिन्हित की गई थीं। प्रशासन का दावा है कि इनमें से 69 इमारतों को ध्वस्त किया गया, लेकिन इसके बावजूद शहर में जर्जर भवनों की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।
90 से ज्यादा लोगों की जा चुकी है जान
जानकारों के अनुसार खतरनाक इमारतों के ढहने की घटनाओं में अब तक 90 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद कई भवन केवल रंगाई-पुताई और मामूली मरम्मत के सहारे खड़े हैं। मानसून के दौरान इन इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों और विवादों से अटक रही कार्रवाई
मनपा अधिकारियों का कहना है कि अति खतरनाक इमारतों को खाली कराने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दबाव, अवैध निर्माण और जमीन मालिकों व पगड़ीधारकों के बीच विवाद बड़ी बाधा बन रहे हैं।
वहीं, मनपा आयुक्त अनमोल सागर ने कहा कि सभी प्रभाग समितियों को अति खतरनाक इमारतों को खाली कराने और आवश्यक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में सोमवार को प्रभाग समिति-1 क्षेत्र में एक खतरनाक इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई।
मानसून से पहले भिवंडी की हजारों जर्जर इमारतें प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जबकि उनमें रहने वाले हजारों परिवार हर बारिश के साथ एक नए खतरे का सामना कर रहे हैं।

