रॉयल्टी वसूली में देरी पर भड़के शिकायतकर्ता, 12 जून से तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना

भिवंडी

अब्दुल गनी खान
भिवंडी: अवैध उत्खनन और मिट्टी भराई से जुड़े कथित रॉयल्टी घोटाले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज शिकायतकर्ताओं ने 12 जून से भिवंडी तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना और अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। आरोप है कि शिकायत और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद तहसील प्रशासन मामले में टालमटोल कर रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, चाविंद्रा गांव के सर्वे नंबर 63, 64, 65, 66, 67/9, 70 और 71 स्थित भूमि पर ‘भिवंडीवाला बिल्डर्स’ और ‘कुबा बिल्डर्स’ द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया गया। आरोप है कि निर्माण के दौरान भारी मात्रा में अवैध उत्खनन और मिट्टी भराई की गई, लेकिन इसके एवज में सरकार को देय रॉयल्टी जमा नहीं कराई गई।

इस मामले को लेकर पूर्व विधायक रूपेश म्हात्रे, पूर्व उपमहापौर अहमद सिद्दीकी, आरपीआई (एकतावादी) के प्रदेश अध्यक्ष विकास निकम और समाजवादी पार्टी के शहर सचिव हमीद शेख ने 3 मई को तहसीलदार अभिजीत खोले से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद तहसीलदार ने संबंधित मंडल अधिकारी को संयुक्त स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही यह कहकर कार्रवाई रोक दी गई कि संबंधित विकासकर्ताओं को नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि इस वजह से मामले की जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ताओं ने ठाणे जिलाधिकारी से भी मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की। विकास निकम ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन केवल मौखिक आदेशों तक सीमित है और कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है।

हमीद शेख का कहना है कि लगातार हो रही देरी के कारण सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि इसी के विरोध में 12 जून से तहसील कार्यालय के समक्ष धरना और अनशन किया जाएगा। आंदोलन की जानकारी देते हुए शांतिनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विनायक गायकवाड़ को भी ज्ञापन सौंपा गया है।

स्थानीय निवासी सुरेश पाटिल ने कहा कि रॉयल्टी वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराने के बावजूद मामले की अनदेखी की जा रही है, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका मजबूत होती है।

      तहसीलदार की प्रतिक्रिया नहीं मिली

इस संबंध में तहसीलदार अभिजीत खोले से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसलिए इस मामले पर उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया है।

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