लोकतंत्र की नींव है मतदान का अधिकार, पात्र मतदाताओं को मिले न्याय : रानीताई अग्रवाल

भिवंडी

भिवंडी तहसील कार्यालय में सौंपा ज्ञापन; 2002 से पूर्व की मतदाता सूचियां उपलब्ध कराने, सहायता केंद्र शुरू करने और विशेष सुविधाएं देने की मांग

भिवंडी। विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को आ रही समस्याओं के समाधान और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न किए जाने की मांग को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष रानीताई अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भिवंडी तहसील कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में उत्तर भारतीय बिहार महाफ्रंट के नेता राजेंद्र यादव, रेहाना अंसारी, भिवंडी कांग्रेस महासचिव मनोज श्रीवास्तव, अशोक पाटोले, मेनका कुमारी, संतोष गुप्ता, अंसारी मंसूर सलीम, निखिल माने, अमरेंद्र कुशवाह और प्रवीण सूद सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल थे।

तहसीलदार की अनुपस्थिति में नायब तहसीलदार आदेश म्हात्रे ने ज्ञापन स्वीकार किया और मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन में रानीताई अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से वर्ष 2002 अथवा उससे पहले से मतदान कर रहे अनेक मतदाताओं के नाम उस अवधि की मतदाता सूचियों में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है और किसी भी पात्र मतदाता को तकनीकी कारणों से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाए जाने की आवश्यकता है।

रानीताई अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) नागरिकों तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी के अभाव में लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, महिलाओं और दिहाड़ी मजदूरों को फॉर्म भरने तथा दस्तावेज जमा करने में विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सभी बीएलओ को नियमित क्षेत्रीय दौरे के निर्देश दिए जाएं, प्रत्येक गांव और वार्ड में सहायता एवं मार्गदर्शन केंद्र स्थापित किए जाएं तथा वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए अलग नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की भी मांग की गई।

ज्ञापन में वर्ष 2002 और उससे पूर्व की मतदाता सूचियों को आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने, पुरानी प्रविष्टियां उपलब्ध न होने की स्थिति में वैकल्पिक प्रमाण स्वीकार करने तथा किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की मांग भी की गई। साथ ही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

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