मुंबई: महाराष्ट्र की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री ‘पंढरपुर वारी और संतों के पदचिह्न’ का भव्य प्रीमियर बुधवार को मुंबई के आयनॉक्स थिएटर में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में हुए इस विशेष प्रदर्शन में राज्य के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी शामिल हुए।
सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय (DGIPR) और वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के संयुक्त प्रयास से तैयार इस डॉक्यूमेंट्री में महाराष्ट्र की प्रसिद्ध पंढरपुर वारी, संतों की परंपरा और लाखों वारकरियों की आस्था की यात्रा को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

प्रीमियर शो में विधान परिषद सभापति प्रा. राम शिंदे, कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, विधायक प्रवीण दरेकर, विधायक निरंजन डावखरे, सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह, संचालक डॉ. किशोर गांगुर्डे सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
22 मिनट में दिखी सदियों पुरानी आस्था की कहानी
करीब 22 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री पंढरपुर वारी की आध्यात्मिक यात्रा, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम सहित संत परंपरा की विरासत और वारकरियों की श्रद्धा को दर्शाती है। प्रीमियर में शामिल लोगों ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री देखते समय ऐसा महसूस हुआ जैसे सिनेमा हॉल में ही पंढरपुर वारी का माहौल जीवंत हो गया हो।
इस फिल्म के माध्यम से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपरा और भक्ति आंदोलन की गहराई को आधुनिक तकनीक के जरिए दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
आठ भाषाओं में तैयार, नौ चैनलों पर होगा प्रसारण
डॉक्यूमेंट्री को मराठी के अलावा हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में डब किया गया है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के दर्शक महाराष्ट्र की इस अनूठी आध्यात्मिक यात्रा को समझ सकेंगे।
इसका प्रसारण डिस्कवरी नेटवर्क के विभिन्न चैनलों पर किया जा रहा है। इसमें डिस्कवरी, डिस्कवरी एचडी, टीएलसी, टीएलसी एचडी, एनिमल प्लैनेट, एनिमल प्लैनेट एचडी, इन्वेस्टिगेशन डिस्कवरी (ID), डिस्कवरी साइंस और डिस्कवरी टर्बो शामिल हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की संत परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पंढरपुर वारी केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सामाजिक एकता, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

