2 लाख से अधिक तेलंगणा तेलुगू परिवार मना रहे पारंपरिक त्योहार
अब्दुल गनी खान
भिवंडी शहर और आसपास के क्षेत्र में लगभग दो लाख से अधिक तेलंगणा के तेलुगू समाज के लोग रहते हैं और वहां का हर त्यौहार यहां के तेलंगणावासी वर्षों से श्रद्धा के साथ मनाते आ रहे हैं।

तेलंगणा राज्य बनने से पहले इस क्षेत्र का विकास न होने के कारण स्थानीय नागरिकों को कई समस्याओं और संकटों का सामना करना पड़ता था। उस समय प्राकृतिक आपदाओं से जान-माल की हानि न हो, इसके लिए गांव की ग्रामदेवी की पूजा कर अपने परिवार की रक्षा के लिए देवी से प्रार्थना की जाती थी। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी तेलंगणा के परिवार देश के किसी भी कोने में रहते हों, वहां निभाई जाती है। गांव के नजदीक देवी मंदिर में जाकर यह पूजा की जाती है।इस उत्सव का विशेष महत्व घर की बेटी और बहन के सम्मान का है। इसलिए हर घर में इस त्योहार पर बहन को घर बुलाकर सम्मान दिया जाता है। इसी कारण उनके यहां बेटी का जन्म होना सौभाग्य माना जाता है।
वरहालादेवी मंदिर में उमड़ी भीड़
भिवंडी की ग्रामदेवी के रूप में श्री वरालादेवी का विशेष मान है। इसलिए आषाढ़ कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक तेलंगणा के तेलुगू परिवारों की इस मंदिर में भारी भीड़ रहती है। बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर देवी की पूजा करते हैं। हर परिवार घर से बना प्रसाद का नैवेद्य देवी को अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मन्नत मांगता है। साथ ही मंदिर के होमकुंड और वहां के प्राचीन वृक्ष की पूजा कर होमकुंड में नैवेद्य चढ़ाया जाता है। अमावस्या का अंतिम दिन मंगलवार सुबह से ही बड़ी संख्या में तेलंगणा के तेलुगू परिवार मंदिर पहुंचे थे। भक्तों के लिए श्री वरालादेवी ट्रस्ट की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे।इस अवसर पर पूर्व सांसद कपिल पाटिल और नगरसेवक सुमित पाटिल ने भी वरालादेवी का दर्शन किया। वहीं अखिल पद्मशाली समाज, भिवंडी के अध्यक्ष पोटाबट्टीनी रामकृष्ण, महासचिव राजू गाजेंगी, कार्याध्यक्ष कोंका मलेश, कोषाध्यक्ष अवधूत बलम और सभी समिति सदस्यों ने भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की थी।

