बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए विकास आराखड़े से हटाए गए आरक्षण? पूर्व सभागृह नेता ने खोला मोर्चा

भिवंडी

अब्दुल गनी खान
भिवंडी शहर के विकास आराखड़े (डेवलपमेंट प्लान) में वर्षों से आरक्षित सार्वजनिक भूखंडों का आरक्षण समाप्त कर बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए पूर्व सभागृह नेता विकास निकम ने बड़ा खुलासा किया है। रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक दबाव, भ्रष्टाचार और कथित मिलीभगत के जरिए शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण आरक्षण हटाने का षड्यंत्र रचा गया। इस दौरान पूर्व उपमहापौर अहमद सिद्दीकी, पूर्व नगरसेवक मतलूब सरदार, सुरेश पाटील और हमीद शेख भी मौजूद रहे।

विकास निकम ने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 के विकास आराखड़े में जिन भूखंडों को ट्रक टर्मिनल, एमएसईबी केंद्र, वाहनतल और कम्युनिटी सेंटर जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित किया गया था, उन्हें वर्ष 2023 के संशोधित विकास आराखड़े में कथित रूप से झूठे अभिप्राय और राजनीतिक दबाव के आधार पर समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आरक्षण क्रमांक 6 (पोगांव ट्रक टर्मिनल), 9 (एमएसईबी, पोगांव), 127 (वाहनतल, कणेरी-अशोकनगर) और 274 (चाविंद्रा कम्युनिटी सेंटर) को हटाने से सीधे तौर पर बिल्डर वर्ग को लाभ मिलेगा और शहर भविष्य की आवश्यक सुविधाओं से वंचित हो जाएगा।

निकम का आरोप है कि विकास आराखड़े पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करने वाली नियोजन समिति ने शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को नजरअंदाज कर कुछ प्रभावशाली लोगों के हित में निर्णय लिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की।

पूर्व उपमहापौर अहमद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि आरक्षित जमीनों को पहले सस्ते दामों पर खरीदने और बाद में आरक्षण हटाकर उनकी कीमत कई गुना बढ़ाने की सुनियोजित साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और नगर रचना संचालनालय से की गई है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

हमीद शेख और सुरेश पाटील ने कहा कि भिवंडी की लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर में उद्यान, खेल मैदान, पार्किंग, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की पहले से अधिक जरूरत है। ऐसे में आरक्षण समाप्त करने के बजाय उसका उद्देश्य बदलकर उसे कायम रखा जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बिल्डरों के कथित अतिक्रमण को बचाने के लिए भी गलत रिपोर्ट तैयार की गई।

हालांकि, इन आरोपों पर नगर प्रशासन अथवा संबंधित सरकारी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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