अब्दुल गनी खान
भिवंडी। भिवंडी के गंगारामवाड़ी स्थित कोहिनूर बिल्डिंग हादसे में 10 लोगों की मौत और तीन लोगों के घायल होने के मामले में आखिरकार नगर निगम प्रशासन की शिकायत पर बिल्डिंग मालिक और मरम्मत कार्य करने वाले ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। हालांकि घटना के दो दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं, हादसे के लिए जिम्मेदार माने जा रहे मनपा अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका के प्रभाग समिति क्रमांक-4 अंतर्गत भंडारी कंपाउंड के गंगारामवाड़ी क्षेत्र स्थित सर्वे नंबर 1557/0 पर वर्ष 2013 में निर्मित चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग का एक हिस्सा गुरुवार रात करीब 11:20 बजे अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य देर रात तक चलता रहा।
हादसे के बाद 31 जुलाई की रात अनाधिकृत बांध काम के प्रभारी सहायक आयुक्त फैसल तातली की शिकायत पर भोईवाड़ा पुलिस ने बिल्डिंग मालिक बिलाल अहमद अबूबकर खान तथा मरम्मत कार्य कर रहे ठेकेदार अशोक पासवान (जो हादसे में मृतकों में शामिल है) के खिलाफ एफआईआर क्रमांक 0319/2026 दर्ज की। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105, 125(ए), 125(बी) और 3(5) के अलावा महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम की धारा 52 तथा महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 53 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मनपा सूत्रों के अनुसार, संबंधित इमारत का निर्माण आवश्यक अनुमति लिए बिना और कथित रूप से घटिया गुणवत्ता के साथ किया गया था। वहीं, बिल्डिंग के पिलरों की मरम्मत का कार्य भी बिना महानगरपालिका की स्वीकृति के कराया जा रहा था।
इधर, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल बिल्डिंग मालिक और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि इमारत को खतरनाक घोषित करने, नोटिस जारी करने, मरम्मत कार्य की निगरानी करने तथा अवैध मरम्मत को रोकने की जिम्मेदारी जिन मनपा अधिकारियों की थी, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
फिलहाल भोईवाड़ा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि मरम्मत कार्य किसकी अनुमति से चल रहा था, इसकी जानकारी किन अधिकारियों को थी और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस हादसे के बाद भिवंडी में जर्जर इमारतों, अवैध निर्माण और महानगरपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि महानगरपालिका ने इमारत को नोटिस देकर औपचारिकता तो पूरी कर दी, लेकिन न तो पानी का कनेक्शन काटा गया और न ही बिजली आपूर्ति बंद की गई। ऐसे में लोग खतरनाक घोषित इमारत में रहने को मजबूर रहे और अंततः यह बड़ा हादसा हो गया।

