भिवंडी में दोस्ती और कारोबारी भरोसे के बीच जमीन के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पिंपलनेर, लोनाड और सोनाले इलाके की करीब 16,380 वर्ग मीटर जमीन से जुड़े 15 दस्तावेज कथित तौर पर बिना अनुमति रजिस्टर्ड कराने का आरोप है। शिकायत के आधार पर निजामपुरा पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ठाणे के कारोबारी हसमुख कंजारिया ने अपने बिजनेस पार्टनर सुरेश प्रताप सिंह, उसके वकील और अन्य सहयोगियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। कंजारिया के मुताबिक, वह जमीन खरीदकर वहां गोदाम बनाने और उन्हें बेचने का कारोबार करते हैं। गोदामों से जुड़े आठ एफएसआई दस्तावेजों की रजिस्ट्री के लिए उन्होंने योगेश खांधार को पावर ऑफ अटॉर्नी दी थी। संबंधित दस्तावेज उनके दोस्त सुरेश सिंह को सौंपे गए थे।
सर्वर डाउन का बहाना, फिर कराई रजिस्ट्री
शिकायत के अनुसार, 12 और 13 नवंबर 2025 को उप-निबंधक कार्यालय क्रमांक-3 में रजिस्ट्री के लिए योगेश के फोटो और अंगूठे के निशान कई बार लिए गए। इस दौरान सर्वर डाउन होने की बात कही गई। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का कथित तौर पर फायदा उठाते हुए 13 और 14 नवंबर को बिना अनुमति 15 अतिरिक्त दस्तावेज रजिस्टर्ड करा लिए गए। इनमें खरीदखत, पावर ऑफ अटॉर्नी और साठेखत शामिल हैं। इन दस्तावेजों में कुल जमीन का रकबा 16,380.44 वर्ग मीटर बताया गया है।
26.75 करोड़ की जमीन, दस्तावेजों में 5 करोड़
शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित जमीन की वास्तविक कीमत करीब 26.75 करोड़ रुपये है, जबकि कथित फर्जी दस्तावेजों में इसकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये दर्शाई गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सितंबर से नवंबर 2025 के बीच सुरेश सिंह ने कंजारिया से 2.30 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिए उधार लिए थे। बाद में इसी रकम को जमीन के सौदे से जोड़ने का आरोप है।
शिकायत के मुताबिक, मामले का खुलासा होने के बाद दस्तावेज रद्द कराने के नाम पर कथित तौर पर 10 लाख रुपये आरटीजीएस और 55 लाख रुपये नकद लिए गए। इसके बाद सिंह के कथित तौर पर गायब होने की बात शिकायत में कही गई है। बाद में दो साठेखत को खरीदखत में बदले जाने की जानकारी भी सामने आई।
निजामपुरा पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर दस्तावेजों, लेन-देन और रजिस्ट्री प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

