प्रदूषण फैलाने वाली टेक्सटाइल, डाइंग और साइजिंग इकाइयों पर शिकंजा
192 निर्माण परियोजनाओं को नोटिस, 32 बेकरी को ईंधन बदलने का निर्देश
विषेश संवाददाता
भिवंडी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए महानगरपालिका और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) ने औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। डाइंग, टेक्सटाइल और साइजिंग की कुल 249 इकाइयों के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 60 इकाइयां बंद की जा चुकी हैं, जबकि 79 इकाइयों के मामले लंबित हैं। वहीं, 110 इकाइयों का डेटा उपलब्ध है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 54 डाइंग इकाइयों में से 12 बंद की गई हैं, 33 का डेटा उपलब्ध है और नौ के मामले लंबित हैं। इसी तरह, 74 टेक्सटाइल इकाइयों में से 17 बंद की गई हैं, 37 का डेटा उपलब्ध है और 20 के मामले लंबित हैं। साइजिंग की 121 इकाइयों में से 31 बंद की गई हैं, 40 का डेटा उपलब्ध है, जबकि 50 इकाइयों के मामले अभी लंबित हैं।

इस बीच, प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ नोटिस और बंदी की कार्रवाई भी की जा रही है। एमपीसीबी ने 22 साइजिंग इकाइयों और सात डाइंग इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, 29 टेक्सटाइल इकाइयों को भी बंदी के नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
निर्माण परियोजनाओं पर भी कार्रवाई
औद्योगिक प्रदूषण के साथ निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर फैले मलबे को भी वायु प्रदूषण की प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसे देखते हुए महानगरपालिका के नगर नियोजन विभाग और पांच प्रभाग समितियों ने 192 निर्माण परियोजनाओं को प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नोटिस जारी किए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल को फैलने से रोकने, मलबे का उचित निस्तारण करने और सड़कों पर निर्माण सामग्री नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
32 बेकरी को ईंधन बदलने का निर्देश
शहर में लकड़ी से चलने वाली 32 बेकरी को एक महीने के भीतर पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) या इलेक्ट्रिक ओवन अपनाने का निर्देश दिया गया था। निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सड़कों की सफाई और पानी के छिड़काव की तैयारी
महानगरपालिका की ओर से प्रमुख सड़कों पर सफाई मशीनों के इस्तेमाल, पानी के छिड़काव और फॉगिंग मशीनों की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, सड़कों और फ्लाईओवर की सफाई के लिए उच्च दबाव वाली पानी की मशीनों का उपयोग करने की योजना है, ताकि धूल के कणों को हवा में फैलने से रोका जा सके।हालांकि, शहर में औद्योगिक इकाइयों, निर्माण परियोजनाओं और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कार्रवाई के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोटिस के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और प्रदूषण कम करने के उपाय जमीन पर कितने सफल साबित होते हैं।

