हर केंद्र पर 21.50 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी, फ्लाईओवर के नीचे पड़ा पोर्टेबल केबिन भी महीनों से बेकार
विशेष संवाददाता
भिवंडी के शांतिनगर इलाके में महानगरपालिका की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी खर्च को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां महज 100 मीटर के दायरे में तीन शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (UHWC) स्थापित किए गए हैं। इनमें से दो केंद्र निरीक्षण के दौरान बंद मिले, जबकि एक पोर्टेबल स्वास्थ्य केबिन राजीव गांधी फ्लाईओवर के नीचे महीनों से बेकार पड़ा होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में केंद्रों के स्थान चयन, उपयोगिता और खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार, भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका ने मुंबई पाइपलाइन के किनारे बिलाल नगर, संजय नगर और न्यू आजाद नगर में ये स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए हैं। शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में इन केंद्रों की जरूरत, उनके बीच की दूरी और खर्च का मुद्दा उठाया गया। बताया गया कि प्रत्येक केंद्र पर करीब 21.50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि कुल खर्च लगभग 68.50 लाख रुपये बताया गया है।
स्वास्थ्य केंद्रों के स्थान चयन को लेकर जनसंख्या संबंधी मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि सामान्य मानकों के अनुसार, 10 हजार से 15 हजार की आबादी पर एक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। ऐसे में महज 100 मीटर के दायरे में तीन केंद्र स्थापित करने की जरूरत क्यों पड़ी, इस पर समिति ने जानकारी मांगी है। केंद्रों के चयन से जुड़े दस्तावेजों और जनसंख्या सर्वेक्षण की जांच की मांग भी की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान संजय नगर का स्वास्थ्य केंद्र बंद मिला। यहां कामकाज का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक निर्धारित बताया गया है। हालांकि, एक कर्मचारी के अनुसार, मरीजों की जांच दोपहर 2 बजे तक ही की जाती है। न्यू आजाद नगर का केंद्र भी बंद पाया गया।
वहीं, बिलाल नगर केंद्र में हर महीने आने वाले मरीजों की संख्या एक हजार से कम बताई गई है। अन्य केंद्रों पर प्रतिदिन 20 से 45 मरीज आने की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों की पुष्टि और केंद्रों की वास्तविक उपयोगिता का आकलन करने की मांग की गई है।
स्थायी समिति ने स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं के स्टॉक, मरीजों के रिकॉर्ड, दवा वितरण और कर्मचारियों की उपस्थिति से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। दवाओं की खरीद और वितरण में कथित अनियमितताओं की आशंकाओं को देखते हुए मामले की जांच की मांग भी की गई है।
महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की प्रतिनिधि डॉ. बुशरा सैयद की ओर से व्यवस्था में गलती स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, केंद्रों को इतने कम अंतर पर स्थापित करने के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिल सका। अब विभाग से अगली बैठक में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की अपेक्षा की गई है।
एक ओर शांतिनगर में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और उनके स्थान चयन पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के अन्य इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी सामने आई है। नगरसेविका हुजैफा हलीम अंसारी ने किदवई नगर टाकिया क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की मांग की है।
अब निगाहें महानगरपालिका की अगली रिपोर्ट पर हैं। समिति यह जानना चाहती है कि तीनों केंद्रों की स्थापना के पीछे क्या आधार था, बंद केंद्रों की स्थिति क्या है और सरकारी खर्च के अनुरूप नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं का कितना लाभ मिल रहा है।

