वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब, ECINET से लेकर फील्ड वेरिफिकेशन तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

देश

वोटरों के नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ERO के पास, AI से वोटर लिस्ट तैयार करने के दावों को आयोग ने नकारा; SIR में घर-घर जांच और राजनीतिक दलों की भागीदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली। वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर, मतदाताओं के नाम हटाने और डिजिटल सिस्टम के जरिए चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपने बचाव में कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों का ब्योरा सामने रखा है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची तैयार करने से लेकर उसमें नाम जोड़ने, संशोधन करने और नाम हटाने तक की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की जाती है। आयोग के मुताबिक, ECINET केवल प्रशासनिक प्रबंधन और रिकॉर्ड रखने का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, न कि अपने आप मतदाताओं के नाम हटाने या जोड़ने वाला ऑटोमेटेड सिस्टम।

आयोग ने चुनाव आयुक्तों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया, युवा मतदाताओं के पंजीकरण और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान अपनाए जाने वाले सत्यापन के तरीकों पर भी सफाई दी है। उसका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तकनीकी व्यवस्था के साथ मानवीय निगरानी, जमीनी जांच और कानूनी अपील के प्रावधान भी मौजूद हैं।

तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर लेते हैं फैसले

चुनाव आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त पर अन्य चुनाव आयुक्तों को नजरअंदाज कर एकतरफा फैसले लेने की बात कही गई थी। आयोग के अनुसार, यह एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त शामिल हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18(1) के तहत आयोग अपने कामकाज और प्रक्रिया का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार करता है। आयोग ने कहा कि मसौदों पर चर्चा, सवाल-जवाब और सुझाव देना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे अंदरूनी मतभेद या फैसलों में हेरफेर के तौर पर पेश करना उचित नहीं है।

आयोग के मुताबिक, बैठकों के लिए एजेंडा तैयार करना, संबंधित दस्तावेज साझा करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना संस्थागत कामकाज का हिस्सा है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी दी सफाई

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवालों के जवाब में आयोग ने 2023 में बनाए गए कानूनी ढांचे का हवाला दिया। इसके तहत नियुक्ति संबंधी चयन समिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के एक सदस्य और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया है।

यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के बाद संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत लागू हुई। आयोग का कहना है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अब निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।

ECINET से अपने आप नहीं हट सकते वोटरों के नाम

वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप था कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाताओं के नाम अपने आप हटाए जा सकते हैं या स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं।

आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत मतदाता सूची से संबंधित कानूनी निर्णय लेने का अधिकार निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के पास होता है। नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया, नोटिस और सुनवाई के बाद ही संबंधित मामलों में फैसला लिया जाता है।

ECINET अधिकारियों को रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक कामकाज में मदद करता है। आयोग के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म अपने आप किसी मतदाता की पात्रता तय करके उसका नाम नहीं जोड़ता या हटाता।

आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के दावों को वह गलत मानता है। उसके मुताबिक, अधिकृत अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में अलग-अलग सुरक्षित लॉगिन के जरिए सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।

घर-घर जाकर जांच, राजनीतिक दलों को भी मिलती है सूची

SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम कथित तौर पर चुपचाप हटाए जाने के आरोपों के बीच आयोग ने जमीनी सत्यापन की व्यवस्था पर जोर दिया है। आयोग के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी का सत्यापन करते हैं।

इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। आयोग के अनुसार, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी मतदाता सूची की जांच में भाग लेते हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत तथा डुप्लीकेट प्रविष्टियों से संबंधित सूचियां सत्यापन के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है। ERO के निर्णय से असहमत होने पर कानून के तहत अपील का प्रावधान भी मौजूद है।

गोवा में सामने आए मामलों पर क्या कहा?

गोवा में मतदाता पंजीकरण से जुड़े कुछ मामलों में नाम सूची में शामिल नहीं होने की शिकायतों पर आयोग ने स्थानीय स्तर पर मानवीय त्रुटि की बात कही है। आयोग के अनुसार, ऐसे मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए वास्तविक स्थिति की जांच की गई और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने की कार्रवाई की गई।

यह स्पष्टीकरण इस सवाल के लिहाज से अहम है कि डिजिटल सिस्टम और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका के बीच जिम्मेदारी कैसे तय होती है। आयोग का पक्ष है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म प्रशासनिक कामकाज में सहायता करता है, जबकि मतदाता सूची से संबंधित वास्तविक निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।

  मतदान केंद्रों पर भी निगरानी के इंतजाम

चुनाव आयोग ने मतदान और मतगणना की पारदर्शिता के लिए मौजूद व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया है। आयोग के मुताबिक, निर्धारित प्रावधानों के तहत मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा उम्मीदवारों के मतदान एजेंट और मतगणना एजेंट भी प्रक्रिया पर नजर रखते हैं।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मतदान से लेकर मतगणना तक की प्रक्रिया में निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

युवाओं के लिए साल में चार बार पंजीकरण का मौका

युवा मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि पात्र नागरिकों को अब साल में चार अर्हता तिथियों के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अवसर मिलता है। ये तिथियां 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर हैं।

नियमित पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान अतिरिक्त जानकारी या घोषणा से संबंधित फॉर्म का इस्तेमाल विशेष सत्यापन प्रक्रिया के लिए किया गया था। इसे नियमित पंजीकरण की व्यवस्था में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आयोग ने यह भी दावा किया कि 24 जून 2025 से 2026 की शुरुआत तक 18 से 28 वर्ष की आयु के लगभग 2.37 करोड़ नए मतदाता सूची में जोड़े गए। उसके मुताबिक, इस आयु वर्ग के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 17.38 करोड़ तक पहुंच गई है।

कानूनी अधिकार, डिजिटल सुरक्षा और मानवीय निगरानी पर जोर

चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में यह संदेश देने की कोशिश की है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता केवल किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं है। इसके लिए कानून में निर्धारित अधिकार, अधिकारियों की जवाबदेही, घर-घर सत्यापन, राजनीतिक दलों की भागीदारी और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

हालांकि, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से हो, गलतियों को समय रहते सुधारा जाए और शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा किया जाए। आयोग ने अपने जवाब में इन्हीं व्यवस्थाओं को चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा का आधार बताया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *