आयुक्त और महापौर की छापेमारी में सामने आई गड़बड़ी, बिना ट्रीटमेंट के केमिकलयुक्त पानी ड्रेनेज में छोड़ने का आरोप
अब्दुल गनी खान
भिवंडी: शहर में प्रदूषण फैलाने वाली डाइंग कंपनियों के खिलाफ भिवंडी मनपा ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 48 घंटे में मनपा आयुक्त और महापौर के नेतृत्व में दो बड़ी डाइंग कंपनियों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान दोनों जगहों पर बिना ट्रीटमेंट के केमिकलयुक्त पानी ड्रेनेज लाइन में छोड़े जाने की स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं।

मनपा के जनसंपर्क अधिकारी श्रीकांत परदेशी के मुताबिक, पहली कार्रवाई बंजारपट्टी इलाके में स्थित महाराष्ट्र डाइंग में हुई। मनपा आयुक्त अनमोल सागर ने उपायुक्त पर्यावरण बालकृष्ण क्षीरसागर के साथ कंपनी के एटीपी प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट चालू मिला, लेकिन जांच के दौरान बिना ट्रीटमेंट किए केमिकलयुक्त पानी कथित तौर पर सीधे मनपा की ड्रेनेज लाइन में छोड़ा जा रहा था।
मौके पर कंपनी के मैनेजर सोहेल अंसारी मौजूद थे। जलापूर्ति विभाग के उपअभियंता सरफराज अंसारी ने पंचनामा तैयार कर पानी का नमूना जांच के लिए भेजा। अधिकारियों ने कंपनी के प्रॉपर्टी टैक्स, लाइसेंस, पर्यावरण एनओसी, फायर एनओसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कंसेंट टू ऑपरेट समेत अन्य दस्तावेजों की भी जांच की।
आयुक्त ने निर्देश दिया कि बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी ड्रेनेज में छोड़े जाने के मामलों में मलनिस्सारण और स्वच्छता विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करे।
दूसरी कार्रवाई नारपोली इलाके के आगरा रोड स्थित शंकर सिल्क मिल्स प्राइवेट लिमिटेड में की गई। सोमवार को महापौर नारायण चौधरी ने उपायुक्त बालकृष्ण क्षीरसागर के साथ कंपनी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पर्यावरण विभाग प्रमुख सुनील भोईर, जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता संदीप पटनावर और फैसल तातली भी मौजूद रहे।
निरीक्षण में कंपनी की ईटीपी व्यवस्था बायपास मिली। आरोप है कि बिना ट्रीटमेंट किया गया रंगीन सांडपानी सीधे मनपा की मलनिस्सारण लाइन में बहाया जा रहा था। पर्यावरण विभाग ने मौके पर पंचनामा कर पानी का नमूना लिया, जबकि जलापूर्ति विभाग ने डिस्चार्ज पॉइंट की जांच की।
अधिकारियों के मुताबिक, बिना उपचार किए औद्योगिक पानी को सीवर लाइन में छोड़ने से ड्रेनेज सिस्टम के साथ पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मनपा प्रशासन ने दोनों मामलों को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों के मुताबिक पंचनामा, पानी की जांच रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को देखते हुए दोनों मामलों की जानकारी महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कल्याण कार्यालय को भी दी जाएगी।
महापौर नारायण चौधरी ने कहा कि किसी भी कंपनी को बिना ट्रीटमेंट किए गंदा पानी सीवर में छोड़ने की अनुमति नहीं है। ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भिवंडी शहर और आसपास के क्षेत्रों में 160 से ज्यादा चिमनी वाली डाइंग, प्रोसेस हाउस और साइजिंग इकाइयां हैं। इनमें कई जगहों पर ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद खर्च बचाने के लिए बिना उपचार किए केमिकलयुक्त पानी नालों और ड्रेनेज लाइनों में छोड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। मनपा की ताजा कार्रवाई के बाद अब अन्य औद्योगिक इकाइयों पर भी निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। मनपा आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण फैलाने या नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

