भिवंडी: समरू बाग स्थित गौरीपाड़ा सर्वे नंबर 70 की कब्रिस्तान की जमीन पर कथित अतिक्रमण और नए निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तहसीलदार कार्यालय की जांच में सामने आए राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जहां जमीन को तत्कालीन नगरपालिका को दफनभूमि के लिए वर्ग किए जाने की जानकारी दी गई है, वहीं अब एक मानवाधिकार संगठन ने कथित अतिक्रमण हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे मामले की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, ठाणे जिला काउंसिल के कॉमरेड डॉ. विजय कांबले की शिकायत से हुई थी। उन्होंने गौरीपाड़ा की सर्वे नंबर 70 की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और गलत तरीके से करारपत्र किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। मामले की जांच मंडल अधिकारी, भिवंडी से कराई गई। 27 फरवरी 2026 को मंडल अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट तहसीलदार कार्यालय को सौंपी।
भिवंडी तहसीलदार एवं कार्यकारी दंडाधिकारी कार्यालय ने 20 मार्च 2026 को जारी पत्र में बताया कि राजस्व अभिलेखों की जांच के दौरान सर्वे नंबर 70 से संबंधित फेरफार क्रमांक 1118, दिनांक 7 अप्रैल 1989 सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, 14 सितंबर 1980 के तालुका आदेश के बाद जमीन को श्मशानभूमि अथवा दफनभूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया था और बाद में इसे तत्कालीन नगरपालिका के पास दफनभूमि के लिए वर्ग किया गया।

तहसीलदार कार्यालय ने रिकॉर्ड के आधार पर बताया कि उक्त जमीन वर्तमान में भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसी के चलते डॉ. विजय कांबले का आवेदन आगे की उचित कार्रवाई के लिए मनपा के उप आयुक्त (मुख्यालय) को भेजा गया।
शिकायत में दावा किया गया है कि सर्वे नंबर 70 की कब्रिस्तान की जमीन के संबंध में कथित रूप से गलत करारपत्र किए जाने को लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ शांतिनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे के खिलाफ भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में भी कार्रवाई की मांग की गई है।
तहसीलदार कार्यालय ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकने और अतिक्रमण होने पर उसे हटाने से संबंधित 7 सितंबर 2010 और 10 अक्टूबर 2013 के शासन परिपत्रों का हवाला देते हुए संबंधित विभाग की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की है।
इस बीच, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन के भिवंडी शहर अध्यक्ष मोमिन दिलशाद अहमद ने 18 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय, ठाणे जिलाधिकारी, भिवंडी उपविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रभाग समिति क्रमांक 4 के अंतर्गत सर्वे नंबर 70 की जमीन पर कथित अतिक्रमण के बाद अब नए कमरे और गाले बनाए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, संबंधित लोग पहले इस जमीन को सर्वे नंबर 41/1 की निजी जमीन बताते हुए वहां पत्राशेड और केबिन बना चुके थे। अब 15 अगस्त 2026 से कमरे और गाले बनाने का काम शुरू करने का आरोप लगाया गया है।
मोमिन दिलशाद ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार की ओर से सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमणकर्ताओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद मनपा के संबंधित अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया। शिकायत में मनपा के उपायुक्त, सहायक आयुक्त प्रभाग समिति क्र 4के खिलाफ मामला दर्ज करने, निलंबन की कार्रवाई करने तथा कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों पर पद के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। शिकायत के साथ तहसीलदार के आदेश की छायाप्रति संलग्न कर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई है।
एक ओर तहसीलदार कार्यालय के राजस्व रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 70 को तत्कालीन नगरपालिका के लिए दफनभूमि के रूप में वर्ग किए जाने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर कथित अतिक्रमण के बाद नए निर्माण के आरोप सामने आए हैं। अब इस मामले में भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजर है।
फिलहाल, मानवाधिकार संगठन की शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित मनपा अधिकारियों का कहना है कि कथित अतिक्रमणकर्ताओं का पक्ष सामने नहीं आया है। प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी अवैध पाए जाने पर अतिक्रमण तोड़ दिया जायेगा।

