म्युनिसिपल मकान नंबर 399 की जमीन को लेकर विवाद; शिकायतकर्ता रोज मनपा कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर, सहायक आयुक्त से निर्माण तत्काल रोकने की मांग
भिवंडी के गौरीपाड़ा इलाके में न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) मिलने के बावजूद कथित तौर पर निर्माण कार्य जारी रहने का मामला सामने आया है। म्युनिसिपल मकान नंबर 399, सिटी सर्वे नंबर 6947, 6948, 6949 और 6950 की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिकायतकर्ता वसीम शमशुद्दीन खान ने प्रभाग समिति क्रमांक-4 के सहायक आयुक्त को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जमीन पर न्यायालय का स्थगन आदेश होने के बावजूद निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने मनपा प्रशासन से तत्काल काम बंद कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के मुताबिक, गौरीपाड़ा स्थित करीब 900 वर्गवार जमीन मालिकों ने वसीम खान को विकसित करने के लिए दी थी। इसमें से लगभग 700 वर्गवार क्षेत्र में उन्होंने दो इमारतों का निर्माण कराया है, जबकि शेष 200 वर्गवार जमीन पर भी विकास कार्य किया जाना था। इसी बीच जमीन मालिकों के साथ विवाद होने के बाद शिकायतकर्ता को आशंका हुई कि शेष जमीन उनकी जानकारी और सहमति के बिना किसी अन्य व्यक्ति को विकास के लिए सौंप दी जाएगी।
वसीम खान का दावा है कि इसी आशंका के चलते उन्होंने भिवंडी न्यायालय से संबंधित जमीन पर स्थगन आदेश प्राप्त किया था। शिकायत में न्यायालयीन प्रकरण का नंबर M.C.A./349/2025 तथा रजिस्ट्रेशन नंबर MCA/83/2026 दर्ज किया गया है। इसके बावजूद आरोप है कि जमीन मालिकों ने कथित तौर पर उनकी जानकारी और सहमति के बिना शेष जमीन पर दूसरे व्यक्ति को निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दे दी और मौके पर काम भी शुरू हो गया।
स्टे ऑर्डर के बाद भी काम शुरू, मनपा प्रशासन से गुहार
शिकायतकर्ता ने सहायक आयुक्त को दिए आवेदन में कहा है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहना अन्यायपूर्ण है और न्यायालयीन आदेश की अवहेलना का मामला हो सकता है। उन्होंने मनपा प्रशासन से निर्माण स्थल का निरीक्षण कर काम तत्काल रुकवाने तथा नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने इस मामले में मनपा कार्यालय में कई बार शिकायत और गुहार लगाई है, लेकिन निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ है। वह कार्रवाई की उम्मीद में रोजाना मनपा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित जमीन को लेकर न्यायालय का स्थगन आदेश होने का दावा किया जा रहा है, तो मौके पर निर्माण कार्य किसकी अनुमति से जारी है? क्या प्रभाग समिति क्रमांक-4 का प्रशासन इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करेगा या शिकायतकर्ता को न्याय के लिए इसी तरह कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे?

