22 साल की उम्र में UPSC पास कर IPS बनीं प्रीति यादव, अब नोएडा जोन-1 की DCP की जिम्मेदारी

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चंडीगढ़ पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल पिता की बेटी ने मेहनत और लगन से हासिल किया मुकाम, बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं प्रीति यादव की सफलता की कहानी


नोएडा जोन-1 की पहली महिला DCP बनने का गौरव भी प्रीति यादव को मिला है। गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह महिला सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े विभागों में अतिरिक्त डीसीपी के रूप में काम कर रही थीं। उनसे पहले इस जोन की जिम्मेदारी आईपीएस साद मियां खान के पास थी।

साधारण पुलिस परिवार से IPS तक का सफर

हरियाणा के रेवाड़ी जिले से ताल्लुक रखने वाली प्रीति यादव का जन्म 10 अप्रैल 1996 को हुआ था। उनके पिता मुकेश यादव चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे और आगे चलकर सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद तक पहुंचे।

पिता को पुलिस विभाग में काम करते देखकर प्रीति के मन में भी सिविल सेवा में जाने की इच्छा पैदा हुई। उन्होंने अपने पिता के संघर्ष और पुलिस सेवा के अनुभव से प्रेरणा लेकर बचपन के सपने को अपना लक्ष्य बनाया।

        पढ़ाई में शुरू से रहीं अव्वल

प्रीति यादव ने 12वीं की परीक्षा आर्ट्स स्ट्रीम से 96.2 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसके बाद उन्होंने भूगोल विषय में बीए ऑनर्स किया और विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल हासिल किया।

सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य इतना मजबूत था कि उन्होंने आगे की पढ़ाई के बजाय यूपीएससी की तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पहले ही प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में सफलता हासिल की।

22 साल की उम्र में UPSC में हासिल की सफलता

वर्ष 2019 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने के समय प्रीति यादव की उम्र महज 22 वर्ष थी। वह 2019 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पहले ही प्रयास में देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी को पास किया।

सहारनपुर से नोएडा तक का प्रशासनिक सफर

आईपीएस बनने के बाद उनकी शुरुआती तैनाती सहारनपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में भी जिम्मेदारियां संभालीं। महिला सुरक्षा और साइबर अपराध जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम करने के बाद अब उन्हें नोएडा जोन-1 की कमान सौंपी गई है।

पुलिस सेवा के अलावा कला में भी रुचि

प्रीति यादव की पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं है। उन्हें पेंटिंग और घूमने-फिरने का भी शौक है। उनकी कला में रुचि और रचनात्मक गतिविधियां भी मीडिया रिपोर्टों में चर्चा का विषय रही हैं।

बेटियों को बोझ समझने वालों के लिए संदेश

प्रीति यादव की कहानी समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश रखती है। किसी बेटी की सफलता उसके परिवार की आर्थिक स्थिति या पिता के पद से तय नहीं होती, बल्कि उसे मिलने वाले अवसर, शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास से उसका भविष्य बनता है।

चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल के पद से अपना सफर शुरू करने वाले पिता की बेटी का आईपीएस अधिकारी बनना और अब नोएडा जैसे महत्वपूर्ण पुलिस जोन की जिम्मेदारी संभालना इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और शिक्षा से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

प्रीति यादव का सफर उन माता-पिताओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपनी बेटियों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। बेटियां अवसर मिलने पर हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता साबित कर सकती हैं।

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