29 सितंबर को ठाणे में स्थापना समारोह, आगरी, कोली, कराड़ी, कुणबी, आदिवासी, भंडारी और बारह बलुतेदार समाज समेत किसान-मछुआरों के मुद्दे उठाने का दावा
ठाणे, 26 सितंबर। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के ठाणे, रायगढ़, पालघर, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर इन पांच समुद्री जिलों में स्थानीय भूमिपुत्रों को एक मंच पर लाने के लिए ‘सागरी भूमिपुत्र महासंघ’ की स्थापना की जा रही है। महासंघ का स्थापना समारोह 29 सितंबर को ठाणे पश्चिम स्थित राम गणेश गडकरी रंगायतन में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इस मंच के जरिए स्थानीय लोगों की जमीन, गांवठाण, कोलीवाड़ा, रोजगार, पुनर्वास, मछली पकड़ने और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाया जाएगा।

महासंघ में आगरी, कोली, कराड़ी, कुणबी, आदिवासी, भंडारी और बारह बलुतेदार समाज के साथ किसान, मछुआरे, परियोजना प्रभावित परिवार, युवक और महिलाएं शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि एमएमआर में तेजी से हो रहे शहरीकरण और बड़े प्रोजेक्टों के कारण स्थानीय भूमिपुत्रों के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी हुई हैं। अलग-अलग संगठन इन मुद्दों को अपने-अपने स्तर पर उठाते रहे हैं, लेकिन पांचों जिलों के समान मुद्दों के लिए एक साझा मंच की जरूरत महसूस की जा रही थी।
गांवठाण और कोलीवाड़े के विकास का मुद्दा
महासंघ की ओर से गांवठाण और कोलीवाड़ों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है। आयोजकों के मुताबिक, शहरों के विस्तार के बीच कई पारंपरिक गांवठाण और कोलीवाड़े विकास की प्रक्रिया में पीछे रह गए हैं। पुराने मकानों के पुनर्निर्माण, घरों की अनुमति, गांवठाण विस्तार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामले कई जगह लंबित हैं।
परियोजना प्रभावितों के पुनर्वास पर जोर
सिडको, एमएमआरडीए, एमआईडीसी, जेएनपीए, बुलेट ट्रेन, वसई-विरार-अलिबाग कॉरिडोर, कोस्टल रोड और वाढवण बंदरगाह जैसे प्रोजेक्टों का उल्लेख करते हुए महासंघ ने स्थानीय किसानों, मछुआरों और परियोजना प्रभावितों के जमीन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही है। महासंघ के अनुसार, स्थानीय लोगों की मांग है कि विकास परियोजनाओं में उचित मुआवजा, पुनर्वास और स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
मछुआरों और समुद्री पर्यावरण का सवाल
महासंघ पारंपरिक मछली पकड़ने के व्यवसाय और समुद्री पर्यावरण के संरक्षण को भी अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल करेगा। आयोजकों का कहना है कि शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण खाड़ियों, जलस्रोतों और समुद्र तटीय क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है। इसका प्रभाव पारंपरिक मछली पकड़ने और उससे जुड़े रोजगार पर पड़ने की चिंता मछुआरा संगठनों की ओर से जताई जाती रही है।
स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता पर फोकस
महासंघ का कहना है कि एमएमआर में उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं को इन अवसरों का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और व्यवसाय के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग महासंघ के एजेंडे में शामिल होगी। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थानीय लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।
बिजली वितरण कंपनियों से जुड़े मुद्दे भी उठेंगे
स्थानीय उपभोक्ताओं से जुड़े बिजली बिल, सेवा, शिकायतों और बिजली वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली के मुद्दों को भी महासंघ के मंच से उठाने की बात कही गई है। आयोजकों के अनुसार, टॉरेंट जैसी बिजली वितरण कंपनियों से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों पर सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
नवी मुंबई एयरपोर्ट के नामकरण का मुद्दा
नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम लोकनेते दि. बा. पाटील के नाम पर रखने का मुद्दा भी महासंघ के प्रमुख विषयों में शामिल है। प्रेस नोट के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद से संबंधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। महासंघ की ओर से कहा गया है कि परियोजना प्रभावितों के अधिकारों के लिए दि. बा. पाटील के संघर्ष को देखते हुए उनके नाम का सम्मान किया जाना चाहिए।
सांसद सुरेश म्हात्रे की पहल
सागरी भूमिपुत्रों के मुद्दे उठाने वाले सांसद सुरेश (बाल्यामामा) म्हात्रे और उनके सहयोगियों की पहल से महासंघ की स्थापना की जा रही है। आयोजकों के मुताबिक, विभिन्न समाजों और संगठनों को एक मंच पर लाकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से स्थानीय भूमिपुत्रों के अधिकारों के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
29 सितंबर को स्थापना समारोह
महासंघ का स्थापना समारोह 29 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक राम गणेश गडकरी रंगायतन, तलाव पाली के पास, ठाणे पश्चिम में होगा। सुबह 9 से 9:30 बजे तक पंजीकरण और नाश्ता, 9:30 से 10:30 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा 10:30 से 12:30 बजे तक स्थापना और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में बालयोगी सदानंद महाराज की विशेष उपस्थिति रहेगी। पद्मविभूषण शरदचंद्र पवार और पद्मश्री लक्ष्मण माने समेत कई नेताओं और सामाजिक क्षेत्र के लोगों के शामिल होने की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के अतिथियों की मौजूदगी के साथ विशेष सागरी रत्न पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।
महासंघ ने पांचों जिलों के आगरी, कोली, कराड़ी, कुणबी, आदिवासी, भंडारी और बारह बलुतेदार समाज के साथ किसान, मछुआरे, परियोजना प्रभावित, युवा, महिलाएं और अन्य स्थानीय नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। महासंघ ने अपना संदेश ‘एक प्रश्न, एक आवाज, एकजुटता’ रखा है।

