अब्दुल गनी खान
भिवंडी : समदिया कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, भिवंडी में सोमवार को सीरत-उन-नबी कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भिवंडी वीवर्स एजुकेशन सोसाइटी के तत्वावधान में तथा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के कल्चरल हाउस, मुंबई के सहयोग से आयोजित हुआ। यूनुस समद ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और बुद्धिजीवियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही।

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अहमदुल्ला सल्फी द्वारा कुरआन पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद उन्होंने वालदैन (माता-पिता) के हुकूक और समाज में इस संबंध में हो रही कोताहियों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि माता-पिता के अधिकारों की अदायगी इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं में शामिल है और आज के दौर में इस पर अमल बेहद जरूरी हो गया है।
मुख्य वक्ता मौलाना अख्तर सुल्तान इसलाही ने “मोहब्बते रसूल और उसके तक़ाज़े” विषय पर संबोधन करते हुए कहा कि हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) से सच्ची मोहब्बत केवल ज़ुबान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके बताए हुए उसूलों और जीवन मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारना ही असली मोहब्बत है। उनके विचारों को श्रोताओं ने गंभीरता से सुना।
कार्यक्रम का कुशल सूत्र संचालन प्रो. जलीश अहमद ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में कल्चरल हाउस ऑफ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, मुंबई के डायरेक्टर मोहम्मद रेजा फज़ल मौजूद रहे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मौलाना औसाफ फलाही ने कुरआन मजीद की वैश्विक शिक्षाओं और हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) के जीवन संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम का पैगाम आज भी पूरी मानवता के लिए अमन, इंसाफ और भाईचारे की राह दिखाता है।
इस अवसर पर समदिया स्कूल/कॉलेज और ईरान के शैक्षणिक प्रतिनिधियों के बीच उच्च स्तरीय शिक्षा, अकादमिक सहयोग और शैक्षणिक आदान-प्रदान को लेकर आपसी समझौता (एमओयू) भी किया गया, जिसे शिक्षा जगत में एक अहम पहल माना जा रहा है।

कार्यक्रम में कॉलेज प्रबंधन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों की ओर से सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया गया। सीरत-उन-नबी कॉन्फ्रेंस का यह आयोजन ज्ञान, सद्भाव और शिक्षा के नए आयाम खोलते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

