ठाणे आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी मामले में किया अरेस्ट, 18 फरवरी तक पुलिस हिरासत
अब्दुल गनी खान
भिवंडी मनपा में 20 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव से ठीक पहले शहर की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ठाणे आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी मामले में पूर्व महापौर विलास पाटिल को शुक्रवार की देर रात गिरफ्तार किया और शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें 18 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

इस गिरफ्तारी के बाद शिवसेना (शिंदे) के नगरसेवकों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया और शहर के कई हिस्सों में दुकानें बंद करवाई। राजनीतिक समीकरणों में इस घटना ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया। आरोप है कि पूर्व महापौर को आगामी महापौर चुनाव से दूर रखने के लिए यह कार्रवाई की गई।
आरोप और गिरफ्तारी का क्रम
पुलिस के अनुसार, ठाणे आर्थिक अपराध शाखा ने वर्ष 2025 में दर्ज एक कथित धोखाधड़ी मामले में पाटिल को बड़ी पुलिस बल के साथ रात 12 बजे छापेमारी कर गिरफ्तार किया। आरोप है कि घर दिलाने के नाम पर कई लोगों से ठगी की गई। गिरफ्तारी के दूसरे दिन, शनिवार को उन्हें भिवंडी न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस दौरान अदालत परिसर को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
गिरफ्तारी के विरोध में शहर के कई हिस्सों में शांतिपूर्ण बंद

पूर्व महापौर की गिरफ्तारी के विरोध में शिवसेना (शिंदे) के नगरसेवकों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में व्यापारियों से संपर्क कर शांतिपूर्ण तरीके से दुकानें बंद करवाई। बालाराम चौधरी ने बताया कि उनके गुट के 12 नगरसेवक अपने-अपने प्रभागों में सक्रिय रहे। कल्याण रोड से साई बाबा मंदिर क्षेत्र तक कई मार्गों पर दुकानें बंद रहीं। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी। नगरसेवकों ने कहा कि उनके नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महापौर चुनाव में भागीदारी के लिए अनुमति की मांग
भिवंडी मनपा महापौर और उपमहापौर का चुनाव 20 फरवरी को होना है। इसके लिए 16 फरवरी को नामांकन दाखिल किया जाएगा। पाटिल के समर्थकों का कहना है कि उन्हें चुनाव से दूर रखने के लिए साजिश के तहत गिरफ्तार किया गया। उन्होंने अदालत से पुलिस हिरासत में रहते हुए भी नामांकन पत्र भरने की अनुमति मांगी है। इसके लिए 16 फरवरी को सुनवाई होनी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुनवाई निर्णायक हो सकती है।
“सिविल विवाद को आपराधिक रंग” देने का आरोप
पूर्व महापौर के वकील नारायण अय्यर ने गिरफ्तारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि वर्ष 2021 में निजामपुरा पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी गई थी। जांच में इसे सिविल विवाद माना गया था और अदालत ने इसे खारिज कर दिया। 2025 में उसी प्रकरण में दोबारा पाटिल का नाम जोड़ा गया। वकील का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव का नतीजा है।

राजनीतिक समीकरण और ‘किंगमेकर’ फैक्टर
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, महायुति में तय हुआ है कि जिस पक्ष के नगरसेवकों की संख्या अधिक होगी, उसका महापौर चुना जाएगा। पाटिल की कोणार्क विकास आघाड़ी में चार नगरसेवक और एक निर्दलीय शामिल हैं, जिससे वे सत्ता गठन में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा रहे थे। चर्चा थी कि उनका समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। कुछ दिन पहले उनका भाजपा विधायक महेश चौगुले के साथ विवाद भी चर्चा में रहा।
16 फरवरी की सुनवाई अब इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ मानी जा रही है। यदि अदालत अनुमति देती है तो चुनावी मुकाबला और रोचक हो सकता है, अन्यथा राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। पूर्व महापौर की गिरफ्तारी और बदलते गठजोड़ों के बीच भिवंडी की सियासत निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है।
20 फरवरी का महापौर चुनाव न केवल स्थानीय बल्कि राज्य की राजनीति के लिए भी अहम संकेत दे सकता है।

