न्यूरो-नेविगेशन तकनीक का उपयोग कर चार मरीजों को दिया ‘जीवन का उपहार’,

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सोलारिस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा मरीजों के लिए वरदान साबित हुई यह अत्याधुनिक तकनीक

विशेष संवाददाता
ठाणे के कासरवडवली में स्थित सोलारिस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने हाल ही में न्यूरो-नेविगेशन तकनीक और न्यूनतम आक्रामक (मिनिमली इनवेसिव) प्रक्रिया का उपयोग करते नाक द्वारा ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कर चार मरीजों को ‘जीवन का उपहार’ दिया है।जबकि पिछले ढाई वर्षों में इस अस्पताल ने इसी तकनीक की मदद से 100 से अधिक ब्रेन ट्यूमर (मस्तिष्क ट्यूमर) के मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है।उक्त जानकारी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन व  हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. अमित ऐवले ने भिवंडी में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी है।

उन्होंने बताया कि न्यूरो-नेविगेशन और एंडोस्कोपिक एंडोनैजल तकनीक का उपयोग करते हुए अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर ऑपरेशन नाक के रास्ते किया गया।जिसे एंडोस्कोपिक एंडोनैजल ट्यूमर एक्सीजन सर्जरी कहा जाता है। डॉ. अमित ऐवले  ने बताया कि नाक के माध्यम से पिट्यूटरी ग्रंथि ट्यूमर एक्सीजन सर्जरी की।डॉ. अमित ऐवले  ने कहा, ‘पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर आमतौर पर स्वत: होते हैं और अनुवांशिक नहीं होते। यह किसी को भी, कभी भी और किसी भी उम्र में हो सकता है।उन्होंने बताया कि भिवंडी निवासी 71 वर्षीय उजैर फकीह और उल्हासनगर के 36 वर्षीय अनिल सोनवणे का ऑपरेशन किया, दोनों को पिट्यूटरी ग्रंथि का ब्रेन ट्यूमर था। ट्यूमर को हटाने नवीनतम तकनीक ‘न्यूरो-नेविगेशन टेक्नोलॉजी’ का उपयोग किया और नाक के माध्यम से ट्यूमर को बाहर निकाला, जिसे एंडोस्कोपिक एंडोनाजल पिट्यूटरी ट्यूमर एक्सिशन सर्जरी कहा जाता है, जो एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी है। ट्यूमर बढ़ने का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। लगभग सभी पिट्यूटरी एडेनोमा गैर-कैंसरयुक्त होते हैं और पिट्यूटरी ग्रंथि में असामान्य वृद्धि से बनते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, पिट्यूटरी एडेनोमा के लिए कोई जीवनशैली-संबंधी या पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार नहीं हैं। उपचार पूरा होने के बाद, डॉक्टर महीनों और वर्षों तक मरीज की रिकवरी पर नजर रखते हैं। सर्जरी के बाद मरीज की नियमित रूप से न्यूरोसर्जन द्वारा फॉलो-अप जांच की जाती है। थकान, पाचन संबंधी गड़बड़ी, पित्ताशय की पथरी और दृष्टि संबंधी समस्याओं जैसे लक्षणों पर ध्यान रखते है।डॉ. अमित ऐवले ने बताया कि ‘ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के बाद मरीजों को लगभग अगले दिन ही डिस्चार्ज किया जा सकता है। नेविगेशन तकनीक सर्जनों को जटिल शारीरिक संरचना वाले क्षेत्र में हर कदम पर सर्जिकल लक्ष्यों के अनुरूप बने रहने में सहायता करती है। यह उपकरण मरीजों के लिए एक वरदान है।’
पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर, जिन्हें पिट्यूटरी एडेनोमा भी कहा जाता है, भारत में पाए जाने वाले आम ब्रेन ट्यूमरों में से एक हैं। हर साल भारत में पिट्यूटरी एडेनोमा के 10 लाख से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। पिट्यूटरी एडेनोमा आमतौर पर दृष्टि में परिवर्तन और सिरदर्द से जुड़े होते हैं। इसलिए किसी को भी इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,बल्कि तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से चिकित्सा सलाह लें। हालांकि शुरुआती पहचान कई मामलों में कठिन होती है, लेकिन अब पहले की तुलना में पिट्यूटरी ग्रंथि के ट्यूमर दवाइयों और उन्नत तकनीकों से उपचार योग्य हैं।

भिवंडी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

सोलारिस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा भिवंडी में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर अनुसया चैरिटेबल ट्रस्ट और रोटरी क्लब ऑफ अर्बेनिया एवं भिवंडी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह शिविर न्यूरोलॉजी समस्याओं,  रीढ़ (स्पाइन) की समस्याओं और कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए है। यह शिविर 23 नवंबर 2025 को रोटरी क्लब ऑफ भिवंडी हॉल, भैरव चैरिटेबल आई हॉस्पिटल के सामने, नजराना कंपाउंड में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होगा।

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