अब्दुल गनी खान (ठाणे)
ठाणे। पत्रकारों और आम नागरिकों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित ‘मान-सिक’ जनजागरण अभियान ठाणे महानगरपालिका सभागार में उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को दूर करने और खुलकर संवाद करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह कार्यक्रम जिला सूचना कार्यालय, ठाणे और ठाणे महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें ठाणे जिला पत्रकार संघ, ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ, वेसाक इंडिया और रिझोनांझ कम्युनिकेशन्स का विशेष सहयोग रहा।
विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव
कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में ठाणे प्रादेशिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमोल भुसारे ने मार्गदर्शन किया। उन्होंने “मौन छोड़ो, संवाद करो” और “जागरूकता से परिवर्तन” जैसे विषयों पर बोलते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुली चर्चा बेहद जरूरी है, तभी समाज में फैले डर और गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है।
लघु फिल्म ने छोड़ी गहरी छाप
कार्यक्रम के दौरान ‘मान-सिक सिनेमैटिक इनिशिएटिव’ के तहत प्रस्तुत एक लघु फिल्म ने उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव डाला। फिल्म के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और समझ विकसित करने का संदेश दिया गया।
संवादात्मक सत्रों में खुलकर हुई चर्चा
विशेषज्ञों की मौजूदगी में आयोजित संवादात्मक सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन सत्रों के जरिए समाज में प्रचलित कई भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिली।
बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकार और नागरिक
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, पत्रकारों, छात्रों और नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ‘अर्थनाद – The Voice Within’ फिल्म के लेखक-निर्देशक पार्था आकेरकर, समीर निगुडकर, वैभव सावंत, संजय पितळे और आनंद कांबळे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (सूचना) संजीवनी जाधव-पाटील ने किया। वहीं पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिला सूचना कार्यालय के यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया गया।
इस पहल के जरिए समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने और कलंक को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

