समाज कल्याण पुरस्कारों में पारदर्शिता की मांग, सिफारिश और दलालों के खेल पर उठे सवाल

महाराष्ट्र

अब्दुल गनी खान (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भिवंडी स्थित साहित्यरत्न अण्णा भाऊ साठे मध्यवर्ती जयंती उत्सव मंडल के सरचिटणीस अशोक रामराव पाटोळे ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, सिफारिशों के प्रभाव को खत्म करने और दलालों के जरिए होने वाले कथित गैरप्रकारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पाटोळे ने 23 मार्च 2026 को सामाजिक न्याय व विशेष सहायता मंत्री संजय शिरसाट, प्रादेशिक उपायुक्त (समाज कल्याण, मुंबई) तथा सहायक आयुक्त (समाज कल्याण, ठाणे) को प्रांताधिकारी भिवंडी के माध्यम से विस्तृत निवेदन सौंपा। इस निवेदन में उन्होंने पुरस्कारों के चयन में हो रही कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई है।

कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों का होता है वितरण

निवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान समाज कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।

इनमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार, लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे पुरस्कार, कर्मवीर दादासाहेब गायकवाड़ पुरस्कार, संत रविदास पुरस्कार, लोककवी वामनदादा कर्डक पुरस्कार, शाहू-फुले-आंबेडकर पारितोषिक और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सामाजिक न्याय प्राविण्य पुरस्कार शामिल हैं।

“योग्यता नहीं, सिफारिश बन रही आधार”

अशोक पाटोळे ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में वास्तविक सामाजिक कार्य के बजाय जनप्रतिनिधियों—जैसे विधायक, सांसद या मंत्री—की सिफारिशों के आधार पर पुरस्कार दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन सच्चे समाजसेवियों के साथ अन्याय होता है, जो वर्षों से जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम कर रहे हैं।

दलालों के जरिए भ्रष्टाचार का आरोप

निवेदन में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में पुरस्कारों से जुड़ी राशि में दलालों के माध्यम से भ्रष्टाचार हो रहा है। इस तरह की गतिविधियां न केवल पुरस्कारों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

पारदर्शी प्रक्रिया और सख्त मानदंड की मांग

पाटोळे ने मांग की है कि चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए स्पष्ट मानदंड तय किए जाएं, स्वतंत्र जांच और सत्यापन तंत्र विकसित किया जाए तथा जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि चयन के दौरान उम्मीदवार के वास्तविक सामाजिक योगदान, कार्य की निरंतरता, समाज पर प्रभाव, प्रामाणिकता और गुणवत्ता का गहन मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

“सच्चे कार्यकर्ताओं को मिले न्याय”

पाटोळे का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान मिलेगा और इन पुरस्कारों की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि इस वर्ष के पुरस्कारों के लिए केवल पात्र और ईमानदार कार्यकर्ताओं का ही चयन सुनिश्चित किया जाए।

स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि विभाग इस गंभीर मांग पर क्या कदम उठाता है।

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