अब्दुल गनी खान
भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका ने मंगलवार को वर्ष 2025-26 का संशोधित और 2026-27 का मूल बजट पेश किया। मनपा आयुक्त अनमोल सागर (आईएएस) ने करीब 1179.10 करोड़ रुपये का यह बजट महापौर नारायण रतन चौधरी को सौंपा। इस मौके पर उपमहापौर तारीक अब्दुल बारी मोमीन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

प्रस्तुत बजट में 73.96 लाख रुपये की शिल्लक दर्शाई गई है, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 241.51 करोड़ रुपये की प्रारंभिक शिल्लक का अनुमान लगाया गया है। बजट को पानी आपूर्ति, सीवरेज, शिक्षा, परिवहन, अग्निशमन, महिला एवं बाल कल्याण, दिव्यांग कल्याण समेत कुल नौ प्रमुख विभागों में विभाजित किया गया है। इसके अलावा सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए शासन के निर्देशानुसार 326.40 लाख रुपये (5 प्रतिशत) का प्रावधान रखा गया है।
विकास योजनाओं पर फोकस
मनपा ने इस बजट में शहर के समग्र विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं।
एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा अभियान के तहत मनपा स्कूलों के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पीएम ई-बस योजना में भागीदारी के लिए 5 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। संपत्ति कर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जीआईएस मैपिंग पर 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा मनपा स्कूलों के नवीनीकरण व मरम्मत के लिए 4 करोड़ रुपये, बुनियादी ढांचा विकास के लिए 59.42 करोड़ रुपये (जिसमें 22 करोड़ रुपये अगले वर्ष के लिए आरक्षित) रखे गए हैं। अग्निशमन व तकनीकी विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने हेतु 3.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अमृत 2.0 योजना के तहत 100 एमएलडी जलापूर्ति परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जबकि सड़कों के चौड़ीकरण के लिए विद्युत खंभों के स्थानांतरण हेतु 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बुनियादी समस्याएं बनी चुनौती
हालांकि बजट में विकास योजनाओं पर जोर दिया गया है, लेकिन शहर की कई बुनियादी समस्याएं अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
पानी आपूर्ति और सीवरेज की समस्या के समाधान के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना का अभाव नजर आता है। इसी तरह बढ़ते ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित सड़कों के लिए भी स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है।
कचरा प्रबंधन को लेकर भी कोई व्यापक और प्रभावी योजना बजट में दिखाई नहीं दी। वहीं, तेजी से बढ़ती आबादी के अनुपात में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
संतुलित बजट, लेकिन सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट विकास और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। शिक्षा, परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देना सकारात्मक संकेत है, लेकिन भिवंडी जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए बुनियादी सुविधाओं पर और अधिक आक्रामक निवेश की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यह बजट शहर के विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि घोषित योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी तरीके से होता है और आम नागरिकों तक इसका लाभ कितनी तेजी से पहुंचता है।

