भिवंडी की सियासत में फिर उभरेगा जनआवाज़ का चेहरा।

ठाणे भिवंडी

खालिद गुड्डू के आने से पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चा।

अब्दुल गनी खान
भिवंडी: शहर की राजनीति इन दिनों गहरी खामोशी से गुजर रही है, लेकिन आम लोगों की परेशानियों की गूंज अब फिर सुनाई देने लगी है। यह गूंज है उस नाम की, जो बरसों से भिवंडी के नागरिकों की तकलीफों को अपनी आवाज़ देता आया है ।
नगरपालिका क्षेत्र में लगातार बढ़ते टैक्स, टूटी हुई सड़कों से जनता की जान जोखिम में, कचरा प्रबंधन की लचर व्यवस्था और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद भिवंडी में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि इन मसलों पर मुखर नहीं दिखता। ऐसे माहौल में खालिद गुड्डू को फिर से लोगों की ज़रूरत के रूप में देखा जा रहा है।
जनता का कहना है कि जब भी कोई संकट आया — चाहे वह बारिश में डूबती गलियां हों, या बेरोजगारी की मार से जूझता युवा — खालिद गुड्डू हमेशा सबसे पहले खड़ा दिखाई देते थे। वह न तो पद पर हैं, न सत्ता में, लेकिन सड़कों पर नागरिकों के साथ मौजूद रहना उनकी पहचान रही है।

लंबे समय से राजनीति से दूरी और कानूनी विवादों में उलझे होने के बावजूद आज भी आम लोग उन्हें एक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस तरह से टैक्स का बोझ बगैर किसी सुविधा के बढ़ता जा रहा है, और जनप्रतिनिधि चुप हैं, ऐसे में अगर कोई इन मुद्दों को मजबूती से उठाने की हिम्मत रखता है, तो वह खालिद गुड्डू हैं। भिवंडी के एक वरिष्ठ नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमें नेता नहीं, मददगार चाहिए। जो सड़कों पर हो, लोगों के साथ चले। खालिद गुड्डू ने यही किया है। बाकी तो चुनाव जीतने के बाद दिखते भी नहीं।”
फिलहाल खालिद गुड्डू की सक्रियता को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से भिवंडी के अलग-अलग इलाकों से उनके पक्ष में आवाजें उठ रही हैं, वह यह संकेत देने के लिए काफी है कि जनता उन्हें फिर से नेतृत्व में देखना चाहती है। अगर यही माहौल बना रहा, तो आने वाले दिनों में भिवंडी की सियासत में एक बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है।

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