पहले 126 एमएलडी मिल रहा था पानी, अब घटकर 115 एमएलडी
12 लाख आबादी वाले शहर को रोजाना चाहिए 180 एमएलडी पानी
भिवंडी : भीषण गर्मी शुरू होते ही भिवंडी शहर में पेयजल संकट गहरा गया है। शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। जरूरत से कम पानी की सप्लाई और मौजूदा सप्लाई में की गई कटौती के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पहले शहर को 126 एमएलडी पानी मिल रहा था, लेकिन अब इसमें 11 एमएलडी की कटौती के बाद सिर्फ 115 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है।

हालांकि, भिवंडी मनपा का जलापूर्ति विभाग पानी की कमी वाले क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए सप्लाई कर हालात संभालने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भविष्य में शहर को लंबे समय तक पानी संकट से राहत दिलाने के लिए मनपा अपना खुद का डैम भी तैयार कर रही है। करीब 12 लाख आबादी वाले शहर में जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
दरअसल, हर साल गर्मी शुरू होते ही भिवंडी में पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इस बार भी नागांव, गायत्री नगर, राम नगर, शांति नगर, पिरानीपाडा, सलामतपुर, संजय नगर, मुमताज नगर, बेतालपाडा, खंडूपाडा, चौहान कॉलोनी, रावजी नगर, नेहरू नगर, निजामपुर, नदी नाका, संगमपाडा, कोंबडपाडा, ब्राह्मण आळी, पारनाका, कासार आळी, बंदर मोहल्ला, ईदगाह रोड, दरगाह रोड, आजमी नगर, बालाजी नगर, टावरे कंपाउंड, रोशन बाग, फैजान कंपाउंड, नारपोली, कामतघर, घूंघट नगर, श्रीरंग नगर और आसबीबी क्षेत्र समेत शहर की 28 झोपड़पट्टी बस्तियों में पानी की भारी किल्लत है।
इन इलाकों में जरूरत से काफी कम पानी पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि पानी की मांग को लेकर रोजाना मनपा कार्यालय पर मोर्चे और प्रदर्शन हो रहे हैं। मनपा प्रशासन टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई कर स्थिति संभालने में जुटा है, लेकिन बढ़ती गर्मी के बीच संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा।
मनपा जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता संदीप पटनावर ने बताया कि शहर को रोजाना 180 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि फिलहाल सिर्फ 115 एमएलडी पानी मिल रहा है। इसमें 73 एमएलडी पानी स्टेम प्राधिकरण से और 42 एमएलडी पानी मुंबई मनपा से मिलता है। यानी शहर को रोजाना करीब 65 एमएलडी पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि मनपा को वरालादेवी तालाब से भी रोजाना 5 एमएलडी पानी मिलता था, लेकिन तालाब में बढ़ते प्रदूषण और गंदगी के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने वहां से पेयजल आपूर्ति पर रोक लगा दी है। इसके अलावा हाल के दिनों में स्टेम प्राधिकरण ने भी 6 एमएलडी पानी की कटौती कर दी है, जिससे संकट और गहरा गया है।
संदीप पटनावर के मुताबिक, पानी संकट वाले इलाकों में फिलहाल पांच टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। इनमें तीन टैंकर मनपा के हैं, जबकि दो अतिरिक्त टैंकर किराए पर लिए गए हैं। इसके अलावा मुंबई मनपा से रोजाना 5 एमएलडी अतिरिक्त पानी देने का अनुरोध भी किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि अतिरिक्त पानी मिलने और वरालादेवी तालाब से दोबारा सप्लाई शुरू होने के बाद हालात में सुधार होगा।
मनपा सूत्रों के मुताबिक, शहर में पानी के अन्य स्रोत भी बदहाल स्थिति में हैं। शहर के 903 हैंडपंपों में से करीब 250 खराब पड़े हैं। 260 जेट पंपों में 35 बंद हैं, जबकि 240 समरसेबल पंपों में से 62 काम नहीं कर रहे। शहर में मौजूद 114 बावड़ियों में से 86 कचरे से पट चुकी हैं, जबकि बाकी बचे कुओं का पानी पीने योग्य नहीं है।
वहीं, शहर में करीब 20 फीसदी पानी चोरी और लीकेज के कारण रोजाना बर्बाद हो रहा है, जिससे पहले से जूझ रही जलापूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

