अबु तल्हा आज़मी
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पुलिस महकमे की छवि को धूमिल करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। देवगांव थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर लालबहादुर प्रसाद को एक वादी से त्वरित कार्रवाई और चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर 5 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जांच में दोषी पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

ग्राम मिर्जापुर निवासी वादी आकाश चौहान ने उच्चाधिकारियों को दी गई शिकायत में बताया कि ग्राम प्रधान सोनू प्रजापति और उसके साथियों द्वारा की गई मारपीट की घटना की विवेचना सब-इंस्पेक्टर लालबहादुर प्रसाद कर रहे थे। आरोप है कि एसआई लगातार तीनों आरोपियों को जेल भेजने, चार्जशीट लगाने और जल्द कार्रवाई करने के एवज में 5,000 रुपये की अवैध मांग कर रहे थे।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संज्ञान लिया और मामले की जांच क्षेत्राधिकारी लालगंज को सौंपी। जांच में रिश्वत मांगने का आरोप सही पाया गया। इसके बाद देवगांव थाने में मुकदमा संख्या 441/2025 धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत दर्ज कर आरोपी एसआई को निलंबित करते हुए हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली की शिकायत सामने आने पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

