मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद, फाल्गुन पूर्णिमा पर खगोलीय घटना
देश वर्ष 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च, सोमवार को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर पड़ेगा। इस खगोलीय घटना को लेकर ज्योतिषाचार्यों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। ग्रहण के चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों पर भी अस्थायी विराम रहेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग तीन घंटे 27 मिनट की रहेगी।
नौ घंटे पहले लगेगा सूतक काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। ऐसे में सुबह से ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, मंत्र जाप और ईश्वर स्मरण किया जा सकता है।
क्या करें और क्या न करें
धर्माचार्यों के अनुसार ग्रहण काल में भोजन करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, जिसका मानव जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता।
गौरतलब है कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला यह चंद्रग्रहण धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और वैज्ञानिक सोच के साथ इस प्राकृतिक घटना को देखें।

