निजी घर में नमाज़ पढ़ने से रोकने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में बरेली के रहने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि व्यक्ति को अपने निजी घर में नमाज़ पढ़ने से रोका गया और पुलिस द्वारा उसे घर से उठाकर ले जाया गया।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा कि हसीन खान को सुरक्षा के लिए दो सशस्त्र पुलिस गार्ड तैनात किए जाएं, जो हर समय उनके साथ रहेंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हसीन खान या उनकी संपत्ति के साथ किसी प्रकार की हिंसक घटना होती है, तो प्रथम दृष्टया यह माना जाएगा कि यह राज्य के इशारे पर हुई है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हसीन खान ने अपने निजी घर में नमाज़ पढ़ने के लिए धार्मिक सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि किसी भी व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अपने मौलिक अधिकारों के अंतर्गत धार्मिक कार्य करने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि जब हसीन खान अपने घर में नमाज़ अदा कर रहे थे, तभी पुलिस उन्हें घर से उठाकर ले गई और उनका चालान कर दिया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें मकान गिराने की धमकी दी गई और उनसे खाली कागज़ों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।

इन आरोपों के आधार पर राज्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान जब अदालत ने पूछा कि क्या निजी संपत्ति में नमाज़ पढ़ने के लिए अनुमति ली गई थी, तो राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि घर में मौजूद सभी लोगों से अनुमति ली गई थी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने हसीन खान को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने इस मामले में कथित अवमानना के आरोपी बरेली के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को 23 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

यह आदेश रिट-सी संख्या 5646/2026, तारिक खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में पारित किया गया है।

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