अब्दुल गनी खान (mumbai)
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के रिक्त अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विधान परिषद सदस्य डॉ. मनीषा कायंदे की नियुक्ति की मांग उठाते हुए ‘भूमिपुत्र एल्गार संगठन’ ने राज्य सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

संगठन के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद पवार ने इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग केवल एक संस्था नहीं, बल्कि राज्य की करोड़ों महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मंच है।
“जमीनी समझ वाला नेतृत्व जरूरी”
प्रमोद पवार ने कहा कि आयोग को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है, जो जमीनी स्तर पर महिलाओं की समस्याओं को समझता हो और उनके अधिकारों के लिए प्रभावी तरीके से आवाज उठा सके। उन्होंने डॉ. मनीषा कायंदे के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बताया।
सामाजिक और प्रशासनिक अनुभव पर जोर
बताया गया कि डॉ. मनीषा कायंदे ने मुंबई विश्वविद्यालय से पीएचडी की है और मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा समिति तथा मुंबई पुलिस की महिला दक्षता समिति में कार्य करते हुए महिलाओं की सुरक्षा, अत्याचार और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।
इसके अलावा, उन्होंने विधान परिषद में अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भारतीय महिलाओं की छवि से जुड़े मुद्दों को भी उठाया था। संगठन के अनुसार, डॉ. कायंदे ने अब तक महिलाओं के अधिकारों को लेकर 125 से अधिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की है।
“महिलाओं को मजबूत सहारे की जरूरत”
पवार ने कहा कि आज की परिस्थितियों में पीड़ित महिलाओं को जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से ज्यादा एक मजबूत और संवेदनशील नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि डॉ. कायंदे ने हमेशा सत्ता से अधिक सेवा को प्राथमिकता दी है और उनकी नियुक्ति महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
इस मांग के सामने आने के बाद अब नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं। देखना होगा कि महिला आयोग के इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति को लेकर सरकार क्या रुख अपनाती है।

