सदरुश्शरिया और ताजुश्शरिया की सेवाओं को किया गया याद
अब्दुल गनी खान
भिवंडी, संवाददाता: भिवंडी के कोटरगेट स्थित सुन्नी जामा मस्जिद में बर-ए-सगीर के दो महान इस्लामी विद्वानों हजरत सदरुश्शरिया मुफ़्ती अमजद अली आज़मी और हजरत ताजुश्शरिया मुफ़्ती अख्तर रज़ा खान को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत नमाज-ए-इशा के बाद मौलाना गुलाम जीलानी की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता काजी शहर भिवंडी अल्लामा मुफ़्ती मुबश्शिर अज़हर मिस्बाही ने की, जबकि सरपरस्ती मौलाना यूसुफ रज़ा कादरी मदनी (मदीना शरीफ) के नाम रही।
नातिया कार्यक्रम में कारी मोहम्मद रज़ा, मौलाना फरहान और मौलाना नसरुद्दीन ने बारगाह-ए-रिसालत में नात पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया।
मुख्य वक्ता काजी शहर मुंब्रा अल्लामा मुफ़्ती शाहनवाज़ मिस्बाही ने अपने संबोधन में दोनों बुजुर्गों की दीन-ए-इस्लाम के लिए दी गई सेवाओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सदरुश्शरिया ने फिक्ह और लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया, वहीं ताजुश्शरिया ने फतवा, रूहानियत और मार्गदर्शन के जरिए पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि दोनों महान हस्तियां अहले सुन्नत के लिए मार्गदर्शक हैं और उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा दे रही हैं।
कार्यक्रम के अंत में सलात-ओ-सलाम, शजरा ख्वानी और कुल शरीफ के बाद काजी शहर मुफ़्ती मुबश्शिर रज़ा की दुआ के साथ समापन हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में उलेमा, छात्र और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

