बच्चों को फिल्मी गीतों से दूर रखने हेतु ऐसे आयोजनों की ज़रूरत — मुफ्ती मुबश्शिर रज़ा अज़हर मिस्बाही
अब्दुल गनी खान
भिवंडी। 30 नवंबर जश्न-ए-गौस अल-वरा के मौके पर रविवार को कोटर्गेट स्थित सुन्नी जामा मस्जिद के सहन में 12वीं वार्षिक ऑल भिवंडी नातिया प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से लेकर मगरिब तक चले इस कार्यक्रम में 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के कुल 60 बच्चों ने भाग लिया और बारगाह-ए-नबी में अपने हुनर का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की सरपरस्ती मदीना मुनव्वरा से तशरीफ़ लाए मुजाहिद-ए-सुन्नियत हज़रत अल्लामा मौलाना मोहम्मद यूसुफ़ रज़ा क़ादरी मदनी ने की। शुरुआती सत्र की शुरुआत मस्जिद के ख़तीब व इमाम हज़रत मौलाना गुलाम जिलानी द्वारा तिलावत-ए-क़ुरआन से की गई, जिसके बाद कारी मोहम्मद रज़ा ने नात पेश कर समा बांधा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए नाज़िम मोमिन फ़ैयाज़ सर ने काज़ी-ए-शहर हज़रत अल्लामा व मौलाना मुफ्ती मुबश्शिर रज़ा अज़हर मिस्बाही का नाम प्रस्तावित किया, जिसे उपस्थित लोगों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। फ़ैयाज़ सर ने बच्चों को प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी देते हुए नात पेश करने की प्रक्रिया की शुरुआत कराई।

ज़ुहर के वक़्फ़े के बाद कार्यक्रम का संचालन डॉ. इमरान रज़ा ने संभाला। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली और धार्मिक नारों के साथ माहौल को रूहानी रंग से सराबोर कर दिया। इस दौरान शहर के कई उलमा, स्कॉलर्स और सामाजिक हस्तियों ने मेहमान-ए-ख़ास के रूप में शिरकत की।
जज की भूमिका मुफ्ती मखदूम रज़ा, मौलाना राहत हुसैन, मौलाना मुअज़्ज़म रज़ा और नाज़िम फ़ैयाज़ सर ने निभाई। सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि प्रथम से सातवें स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को काज़ी-ए-शहर हज़रत मुफ्ती मुबश्शिर रज़ा मिस्बाही के हाथों ट्रॉफी और प्रमाणपत्र दिया गया।
कार्यक्रम की सफलता में सुन्नी जामा मस्जिद कोटर्गेट के मैनेजिंग ट्रस्टी नसीम रज़ा, एजाज़ शेख और मोहम्मद सर के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भी सम्मानित किया गया। जजों और आयोजन से जुड़े अन्य सदस्यों को भी ट्रॉफी प्रदान की गई।
अंत में सलात-ओ-सलाम और दुआ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। नसीम रज़ा ने सभी मेहमानों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “बच्चों के नैतिक व धार्मिक भविष्य को संवारने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”

